रानीगंज — रानीगंज के प्रतिष्ठित टीडीबी कॉलेज में 16 मई को हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद, जिसमें एक प्रोफेसर के साथ बदसलूकी की गई थी, कॉलेज प्रबंधन समिति ने आखिरकार कड़ा और निर्णायक कदम उठाया है. गुरुवार देर संध्या को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉलेज प्रशासन ने घोषणा की कि घटना में शामिल छात्रों को फिलहाल केवल परीक्षा देने और परीक्षा संबंधी कार्यों के लिए ही कॉलेज आने की अनुमति होगी।
क्या था मामला?
यह पूरा प्रकरण 16 मई को शुरू हुआ, जब टीडीबी कॉलेज की टीचर काउंसिल की बैठक चल रही थी. आरोप है कि इसी दौरान एक छात्र बैठक में घुस आया और टीचर-इन-चार्ज प्रोफेसर मिलन मुखर्जी को उंगली दिखाकर बात करने लगा. फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर पर्साल किस्कु ने इस व्यवहार का कड़ा विरोध किया, जिसके बाद कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई. घटना के बाद कुछ छात्र और बाहरी लोग इस मुद्दे को लेकर कॉलेज में उत्तेजना फैलाने लगे.
कॉलेज के कई शिक्षक-शिक्षिकाओं ने टीआईसी रूम के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें कुछ छात्र भी शामिल हो गए. यह प्रदर्शन देर शाम तक चला और उस दिन कॉलेज परिसर में भारी तनाव और अराजकता का माहौल देखा गया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रोफेसर पर्साल किस्कु को सुरक्षा व्यवस्था के साथ घर भेजा गया.
आदिवासी संगठनों का समर्थन और आरोप
इस घटना के बाद, 26 मई को आदिवासी समुदाय के लोगों ने रानीगंज थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने प्रोफेसर पर्साल किस्कु के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया. उन्होंने सीसीटीवी फुटेज की जांच का हवाला देते हुए कहा कि मारपीट के आरोप निराधार हैं इसके विपरीत, उन्होंने टीचर-इन-चार्ज मिलन मुखर्जी द्वारा छात्र के उंगली दिखाकर धमकाने की घटना को गंभीरता से न लेने पर सवाल उठाए.
9 जून को, आदिवासी संगठनों ने प्रोफेसर पर्साल किस्कु के समर्थन में कॉलेज में एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी कल, आदिवासी समुदाय की तरफ से कॉलेज को ईमेल कर यह जानने की कोशिश की गई कि उन छात्रों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है जिन्होंने एक आदिवासी प्रोफेसर के साथ बदतमीजी की थी
कॉलेज प्रबंधन समिति का सख्त फैसला
इन सभी घटनाओं की गंभीरता को समझते हुए, कॉलेज प्रबंधन समिति ने पूरी जांच के बाद 17 जुलाई, गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सख्त कदम उठाने की घोषणा की। इस महत्वपूर्ण बैठक में कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष तापस बंदोपाध्याय (जो रानीगंज के विधायक भी हैं), टीचर-इन-चार्ज प्रोफेसर मिलन मुखर्जी, प्रोफेसर पंकज कुमार सोरेन, डॉ. अमिताभ नायक, प्रोफेसर शफाकत कमाल और प्रोफेसर फाल्गुनी मुखोपाध्याय (बीसी कॉलेज के प्रिंसिपल) सहित कई वरिष्ठ शिक्षक उपस्थित थे.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक तापस बंदोपाध्याय ने कहा कि 16 मई को टीडीबी कॉलेज में हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी और इसमें कॉलेज के कुछ विद्यार्थियों द्वारा शिक्षकों के साथ अवांछित आचरण किया गया था. उन्होंने बताया कि फिलहाल जिन छात्रों पर शिक्षकों के साथ बदतमीजी करने का आरोप है, उन्हें परीक्षा के अलावा कॉलेज में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। वे सिर्फ परीक्षा देने के लिए कॉलेज आ सकते हैं.
विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि कॉलेज प्रबंधन प्रशासनिक कार्रवाई नहीं कर सकता, इसके लिए पुलिस प्रशासन है. इसलिए पुलिस प्रशासन से 16 मई की घटना के बाद दर्ज कराई गई शिकायत पर की जा रही कार्रवाई के बारे में जानकारी ली जाएगी.
छात्रों के भविष्य और सम्मानजनक वातावरण पर जोर
तापस बंदोपाध्याय ने इस बात पर जोर दिया कि छात्र और शिक्षकों के बीच एक सम्मानजनक वातावरण रहना चाहिए. उन्होंने कहा, "कुछ भी हो जाए छात्रों को अपने शिक्षकों का सम्मान करना होगा, यही हमारी संस्कृति है और अगर किसी छात्र ने ऐसा नहीं किया तो उसके खिलाफ जो भी उचित कार्रवाई होगी वह की जाएगी." उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि कॉलेज में पठन-पाठन के माहौल को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा और कॉलेज प्रबंधन इसे लेकर सजग है.
गौरतलब है कि आदिवासी संगठनों ने भी छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए किसी सख्त कदम से फिलहाल परहेज करने की बात कही थी.
संथाली भाषा में पढ़ाई और आदिवासी समुदाय की भावनाएं
तापस बंदोपाध्याय ने बताया कि टीडीबी कॉलेज में संथाली भाषा में पठन-पाठन शुरू किया गया है और यह इस पूरे सबडिवीजन में एकमात्र कॉलेज है जहां संथाली भाषा में पढ़ाई करवाई जाती है.उन्होंने कहा कि ऐसे में आदिवासी समुदाय की भावनाओं को आहत करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता.


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