नदिया की रानाघाट निवासी रुम्पा दास ने विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई कर सफलता प्राप्त की है। रानाघाट नगरपालिका के वार्ड नंबर 18 की रहने वाली रुम्पा की इस उपलब्धि से पूरा क्षेत्र गौरवान्वित है। एवरेस्ट विजय ने उनके जीवन में एक नया मुकुट जोड़ दिया है और रानाघाट का नाम पूरे देश में रोशन किया है। लेकिन इस सफलता के साथ एक गहरी पीड़ा भी जुड़ी है। रुम्पा के साथ एवरेस्ट फतह की इस यात्रा में शामिल सुब्रत घोष, जो रानाघाट नगरपालिका के वार्ड नंबर 3 के निवासी थे, चोटी तक पहुँचने के बाद वापस नहीं लौट सके। 10 मई को दोनों नेपाल की ओर बेस कैंप से ऊपर के कैंप की ओर रवाना हुए थे और गुरुवार को दोपहर में चोटी पर पहुँचे। रुम्पा तो सुरक्षित लौट आईं, लेकिन सुब्रत घोष की वापसी नहीं हो सकी। उनके परिवार को मोबाइल पर एक संदेश मिला जिसमें बताया गया कि "सुब्रत अब नहीं रहे।" इस खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई। रुम्पा ने भावुक होकर कहा, "यह मेरा वर्षों पुराना सपना था, जो अब पूरा हुआ है। मैंने पूरी श्रद्धा से समुद्र माता के चरणों में प्रार्थना की थी और उन्हीं के आशीर्वाद से मैं सफल हो सकी। एवरेस्ट की चोटी पर मैं लगभग 15 मिनट रही जहाँ बहुत तेज़ हवा चल रही थी।"सुब्रत घोष के बारे में उन्होंने कहा, "मैं बहुत दुखी हूँ। एक भारी मन के साथ लौटी हूँ। मैंने एवरेस्ट विजय तो की है, लेकिन खुश होकर इसका जश्न नहीं मना पा रही हूँ।"

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