रानीगंज: चैती छठ के पावन अवसर पर रानीगंज में छठ व्रतियों ने पारंपरिक श्रद्धा और गहरी आस्था के साथ इस महत्वपूर्ण पर्व को मनाया.शहर के सुप्रसिद्ध छठ तालाब, बरदही में इस उत्सव का भव्य और मनोरम दृश्य देखने को मिला, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए.
पहले इस क्षेत्र में चैती छठ का प्रचलन अपेक्षाकृत कम था, लेकिन उत्तर भारत के प्रवासी समुदाय की बढ़ती उपस्थिति के कारण अब यह त्योहार यहाँ पूरे उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाने लगा है. इस वर्ष भी बरदही छठ तालाब पर श्रद्धालुओं भीड़ दिखी जो इस पर्व के प्रति उनकी अटूट आस्था का जीवंत प्रमाण था.
चैती छठ हिंदू धर्म में एक विशिष्ट स्थान रखता है और मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है यह अनुपम पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, जल की महत्ता और जीवनदायी सूर्य देव की उपासना का प्रतीक है.छठ व्रत पूर्णतः सूर्य देव और छठी मईया को समर्पित है, जिनकी कृपा और आशीर्वाद की कामना इस व्रत के माध्यम से की जाती है.
इस कठिन व्रत की शुरुआत 'नहाय-खाय' नामक अनुष्ठान से होती है.इस दिन व्रती पवित्र जल में स्नान करते हैं और पूर्णतः सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं, जो तन और मन की शुद्धि का प्रतीक है.व्रत के दूसरे दिन 'खरना' का विधान है इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और संध्याकाल में गुड़ तथा चावल की बनी खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं. यह प्रसाद शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है.

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