बांकुडा: 26 सूत्री मांगों को लेकर बांकुरा जिला कमेटी के तत्वावधान में एसयूसीआई (सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया) द्वारा आयोजित प्रतिनियुक्ति एवं विरोध कार्यक्रम में उस समय तनाव उत्पन्न हो गया जब प्रदर्शनकारियों को पुलिस अवरोध का सामना करना पड़ा।
एसयूसीआई के कार्यकर्ता और समर्थक बांकुड़ा के तमली बांध से जिला डाकघर मचंतला होते हुए जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। उनका उद्देश्य जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में प्रवेश कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपना था। हालांकि, रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने वहीं पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
स्थिति उस समय और अधिक उग्र हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के अवरोध को नजरअंदाज करते हुए बैरिकेड तोड़कर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में घुसने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हाथापाई भी हुई।
हालांकि, हंगामे के बाद प्रदर्शनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में दाखिल हुआ और उन्होंने अपनी मांगों का एक ज्ञापन सौंपा।
एसयूसीआई जिला कार्यकारी समिति के सदस्य दिलीप कुंडू ने प्रदर्शन के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, "आज का यह प्रतिनिधिमंडल हमारी 26 सूत्री मांगों को लेकर आया था।" उन्होंने बताया कि उनकी मुख्य मांगों में जिले को सूखा मुक्त घोषित करना और जंगलमहल क्षेत्र के एकमात्र अस्पताल में विभिन्न आवश्यक विभाग खोलना तथा पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति करना शामिल है।
दिलीप कुंडू ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में जिले के सभी 22 ब्लॉकों में एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
पुलिस द्वारा लगाए गए अवरोधों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, "पुलिस अपना काम करेगी। उनका कर्तव्य देश के कानून की रक्षा करना है और कानून व्यवस्था बनाए रखना है।" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जब कोयला और अवैध रेत की तस्करी जैसी गैरकानूनी गतिविधियाँ हो रही हैं, तो पुलिसकर्मी सड़कों पर पैसे वसूलते हुए देखे जाते हैं, लेकिन जनहित के मुद्दों पर प्रदर्शन करने वालों को रोका जाता है।
उन्होंने दृढ़ता से कहा कि एसयूसीआई शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखेगी, लेकिन यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे कानून तोड़ने के लिए भी बाध्य हो सकते हैं।

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