रानीगंज: शहर की दो प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थाओं, सुभाष स्वदेश भावना और अंजुमन इमदाद ए बहिमी, ने मिलकर एक महत्वपूर्ण पहल की है. इन दोनों संस्थाओं ने संयुक्त रूप से 20 अप्रैल को रानीगंज में एक शांति रैली आयोजित करने का निर्णय लिया है. इस संबंध में जानकारी देने के लिए शुक्रवार को शोष्टि गोरिया स्थित जायका रेस्टोरेंट में एक प्रेस वार्ता कर सुभाष स्वदेश भावना संस्था के अध्यक्ष गोपाल आचार्य और अंजुमन इमदाद ए बहिमी के हाजी अनवर तथा सचिव नदीम सब्बानी ने बताया कि यह शांति रैली 20 अप्रैल को शाम 4 बजे तार बांग्ला मोड़ से शुरू होगी और एनएसबी रोड, बड़ा बाजार होते हुए थाना रोड के रास्ते नेताजी मोड़ पर समाप्त होगी.
इस अवसर पर सुभाष स्वदेश भावना संस्था के अध्यक्ष गोपाल आचार्य ने देश में फैल रही नफरत पर गहरी चिंता व्यक्त की.उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुखद है कि अंग्रेजों ने भी हिंदुस्तान में उतना सांप्रदायिक माहौल नहीं बिगाड़ा था जितना कि स्वतंत्र भारत में किया जा रहा है.उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने 'फूट डालो और राज करो' की नीति अपनाने की कोशिश की थी, लेकिन हिंदुस्तान में हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई हमेशा एकजुट होकर रहे हैं और आज भी रहते हैं. धर्म और जाति के बंधनों को तोड़कर सभी को शांति का संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन दुर्भाग्य से कुछ लोग देश में नफरत के बीज बो रहे हैं. उन्होंने रानीगंज और बंगाल में हुई कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का भी जिक्र किया जिनसे सांप्रदायिक सौहार्द को ठेस पहुंची है. इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों संस्थाओं ने मिलकर 20 अप्रैल को शांति रैली निकालने का निर्णय लिया है, जिसमें सभी धर्मों के लोग शामिल होकर शांति और एकता का संदेश देंगे.
वहीं, अंजुमन इमदाद ए बहिमी के सचिव नदीम सब्बानी ने कहा कि आज के दौर में नफरत की नहीं, बल्कि प्यार की आवश्यकता है, अन्यथा देश प्रगति नहीं कर पाएगा. जो नफरत का माहौल बनाया जा रहा है, वह न तो वर्तमान के लिए अच्छा है और न ही भविष्य के लिए. उनकी संस्था हर वह कदम उठाएगी जो मानवता और लोगों के हित में हो. इसीलिए इस शांति रैली में अंजुमन इमदाद ए बहिमी और सुभाष स्वदेश भावना के साथ-साथ अन्य संस्थाओं के लोग भी हिस्सा लेंगे और सब मिलकर मोहब्बत का पैगाम देंगे. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस शांति रैली के माध्यम से रानीगंज पूरे देश को यह संदेश देगा कि लोग नफरत फैलाने की कोशिशों के बावजूद धर्म और जाति के झगड़ों में नहीं पड़ेंगे और किसी के बहकावे में आकर अपने भाईचारे को नष्ट नहीं होने देंगे.उन्होंने दृढ़ संकल्प व्यक्त किया कि यदि कोई नफरत की आंधी लाना चाहेगा तो हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई मिलकर उसका सामना करेंगे.



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