कोलकाता (पीबी टीवी ) कभी पेट की भूख के कारण, तो कभी परिवार के भरण-पोषण के लिए, दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में लड़कियां अक्सर लालच के कारण तस्करी का शिकार हो जाती हैं। कभी-कभी अपनी शौक को पूरा करने के लिए भटक भी जाती हैं। सिर्फ इतना ही नहीं कुछ दलाल प्रेम के जाल में फंसा कर लड़कियों को रेड लाइट इलाकों में बेच देते हैं. न चाहते हुए लड़कियों को तस्करी और देह व्यापर के धंधों का शिकार पड़ता है। लेकिन आजकल प्रशासन और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों की पहल के कारण तस्करी की गई सभी महिलाओं को वापस लाया जा रहा है। संगठन की ओर से बशीरहाट ब्लॉक नंबर 2 के कार्यक्रम प्रबंधक रवींद्रनाथ विश्वास ने कहा कि घर लौटने के बाद उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों की तिरछी निगाहों से लेकर परिवार के सदस्य भी प्रायः इन लौटी युवतियों को स्वीकार नहीं करना चाहते। उन्हें एक तरह के सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। इस बार बशीरहाट के तीन स्वयंसेवी संगठनों ने इस समस्या के समाधान की पहल की है। उन्होंने बशीरहाट महकमा के बशीरहाट 2 ब्लॉक के धन्यकुरिया ग्राम पंचायत के हॉल में एक कार्यशाला और परामर्श कार्यक्रम का आयोजन किया। उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि सभी उत्पीड़ित लड़कियों और महिलाओं को समाज के मुख्य धारा में वापस लौटना है; ताकि वे वापस लौटकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और उन्हें सामाजिक बहिष्कार का सामना न करना पड़े।

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