रानीगंज- रानीगंज प्रखंड अंतर्गत तीराट ग्राम पंचायत के दामोदर नदी तिराट घाट क्षेत्र में अवैध बालू खनन से स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है. ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यहाँ तीन स्थानों से अवैध रूप से बालू निकाला जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि सड़कें और पुल भी जर्जर हो रहे हैं.
ईसीएल के नाम पर अवैध खनन: स्थानीय लोगों का आरोप है कि ईसीएल के नाम पर सुबह 3:00 बजे से 6:00 बजे तक अवैध रूप से बालू निकाला जाता है, जिसे विभिन्न स्थानों पर भेजा जाता है. आसनसोल के एक निवासी को बालू निकालने का ठेका दिया गया है, जहाँ 18 चक्के वाले ट्रक में 40 से 50 टन तक बालू भरकर निकलते हैं. इससे ग्रामीण सड़कें पूरी तरह से ध्वस्त हो गई हैं, जबकि इस सड़क के क्षमता केवल 10 टन है.
गलत चालान का उपयोग: प्रदर्शन करियो का आरोप है कि बालू लदे वाहनों को दामोदर नदी के पुरुलिया जिले का चालान दिया जा रहा है, जबकि बालू बांकुडा जिले के शालतोड़ ब्लॉक के शालमा पंचायत अंतर्गत साहेबडांगा से निकाला जा रहा है. इसके अतिरिक्त, ट्रैक्टरों के माध्यम से भी अवैध रूप से बालू निकाला जा रहा है, जिसमें कुछ स्थानीय निवासी भी शामिल हैं.
महंगे दामों पर बालू की बिक्री: स्थानीय स्तर पर बालू ₹3200 प्रति ट्रॉली और चालान के साथ ₹4000 में बेचा जा रहा है. ट्रैक्टरों में ओवरलोडिंग की जा रही है और कुछ ट्रैक्टरों को उनकी क्षमता से दोगुना तक बनाया गया है, जिससे अवैध बालू तस्करी हो रही है.
ग्रामीणों ने किया सड़क जाम: अवैध खनन और जर्जर सड़कों के खिलाफ हाड़ाभांगा और तिराट इलाके की महिलाओं ने बालू लदे वाहनों को रोककर धरना प्रदर्शन किया. उन्होंने मांग की कि ग्रामीण सड़कों की मरम्मत की जाए और स्थानीय बेरोजगारों को बालू घाटों में काम दिया जाए बाउरी समाज के बैनर तले ग्रामीणों ने हाड़ाभांगा पुल को भी जाम कर प्रदर्शन किया. उन्होंने पुल की जर्जर अवस्था पर चिंता व्यक्त की और प्रशासन से तत्काल मरम्मत की मांग की.
पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया,पर सन्ध्या तक बालू लदे वाहनों का आवागमन बंद था.


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