रानीगंज- रानीगंज के सियारसोल ग्राम प्राइमरी स्कूल में गुरुवार को एक अनोखा नजारा देखने को मिला. स्कूल के शिक्षक, प्रमुख डॉक्टर और बच्चे सभी मिलकर बसन्त उत्सव मनाया, ऐसा लग रहा था मानो शांतिनिकेतन को ही स्कूल परिसर में ले आया गया हो.
रानीगंज के आदिवासी और प्रदूषित क्षेत्र के बीच स्थित इस स्कूल ने हमेशा ही छात्रों को नई-नई गतिविधियों के माध्यम से असाधारण बनाने का प्रयास किया है. इस बार, उन्होंने शांतिनिकेतन के डोल उत्सव की तर्ज पर पलाश के फूलों और अन्य फूलों से सजाकर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया. बच्चों ने स्कूल के पौधों से प्राकृतिक और हर्बल रंगों का इस्तेमाल किया.
कार्यक्रम में रानीगंज के प्रमुख चिकित्सक डॉ. अनिर्बान घोष विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे. उन्होंने बच्चों की मदद के लिए हर संभव प्रयास करने का आश्वासन दिया. डॉ. घोष ने पहले भी स्कूल की कई परियोजनाओं का समर्थन किया है, और उन्होंने बच्चों को चिकित्सा और शैक्षिक सामग्री प्रदान करने की घोषणा की.
यह बसन्त उत्सव न केवल बच्चों के लिए एक यादगार अनुभव रहा, बल्कि इसने उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं से भी जोड़ा.स्कूल के प्रधान शिक्षक निर्माल्या सेनगुप्ता के इस प्रयास की सभी ने सराहना की.
दूसरी और रानीगंज के खाँड़सूली स्तिथ श्री दुर्गा प्राथमिक विद्यालय में बच्चों ने खेली फूलों और हर्बल अबीर की होली, दिया एकता और सौहार्द का संदेश
रानीगंज श्री दुर्गा विद्यालय के प्राथमिक विभाग में आज बच्चों ने फूलों और हर्बल अबीर से होली खेली. रंगोत्सव का यह त्योहार धर्म और जाति से ऊपर उठकर एकता और सौहार्द का संदेश देता है.
विद्यालय के प्रधान शिक्षक प्रदीप सिंह राठौर ने बताया कि होली भाईचारे और सहानुभूति का प्रतीक है इसका अर्थ है कि हमें पिछली बातों को भूलकर मिलजुल कर रहना चाहिए. बच्चों ने भी इस संदेश को आत्मसात करते हुए एक-दूसरे को रंग लगाया और होली की शुभकामनाएं दीं
इस आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के प्रधान शिक्षक प्रदीप सिंह राठौर के साथ-साथ अन्य शिक्षक गीता कुमारी, सुमन भकत और रूपेश कर्मकार ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सभी ने मिलकर बच्चों के लिए एक यादगार और खुशनुमा माहौल बनाया.
बच्चों ने फूलों और हर्बल अबीर से होली खेलकर न केवल आनंद लिया, बल्कि होली के वास्तविक महत्व को भी समझा. यह त्योहार हमें सिखाता है कि हमें हमेशा मिलजुल कर रहना चाहिए और एक-दूसरे के प्रति सहानुभूति रखनी चाहिए.



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