बाँकुड़ा: जिला स्वास्थ्य विभाग के आयुष शाखा की ओर से तीसरे वर्ष के दूसरे चरण का आयुष मेला शुरू हो गया है.शुक्रवार को बाँकुड़ा रवींद्र भवन प्रांगण में मेले का उद्घाटन हुआ. उद्घाटन समारोह में राज्य मंत्री ज्योत्सना मांडी, विधायक मृत्युंजय मुर्मू, बाँकुड़ा नगरपालिका के अध्यक्ष अलका सेन मजुमदार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.
मेले के आयोजक बाँकुड़ा जिला स्वास्थ्य विभाग, आयुष शाखा के अनुसार, इस मेले का मुख्य उद्देश्य आधुनिक विज्ञान पर आधारित और प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के बीच समन्वय स्थापित करना है. दो दिवसीय इस मेले में आयुर्वेदिक चिकित्सा, आयुष क्लीनिक, एन.सी.डी क्लीनिक, योग आदि से संबंधित कई स्टॉल पूरी तरह से मुफ्त लगाए गए हैं. इसके अलावा मेले में औषधीय पौधों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है.
मेले में आए लोगों ने बताया कि प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद ही भविष्य है.उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है, इसलिए वे इस चिकित्सा पद्धति की ओर रुख कर रहे हैं.
इस अवसर पर मंत्री ज्योत्सना मांडी ने कहा कि हम जरूरत पड़ने पर होम्योपैथी-एलोपैथी लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद का कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने कहा कि इस मेले का मुख्य लक्ष्य लोगों का इस चिकित्सा पद्धति के प्रति खोया हुआ विश्वास वापस लाना है.
जिला स्वास्थ्य अधिकारी (आयुष) पार्थ सारथी राय ने कहा कि कैंसर, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है. इन रोगों की रोकथाम के लिए आयुष चिकित्सा पद्धति का कोई विकल्प नहीं है. प्रकृति के साथ मनुष्य का गहरा संबंध है. इसलिए स्वस्थ रहने के लिए यह चिकित्सा पद्धति ही एकमात्र सहारा है.

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