रानीगंज: नारायणकुडी मथुरा चंडी घाट क्षेत्र की मनोरम प्राकृतिक छटा के बीच शुक्रवार को कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला . भारत कला केंद्र द्वारा आयोजित एक विशेष कला शिविर में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 32 कलाकारों ने अपनी कूची और रंगों से प्रकृति के सौंदर्य और सामाजिक मुद्दों को जीवंत किया.
इस कला शिविर में कलाकारों ने न केवल पश्चिम बंगाल की बल्कि भारत की विभिन्न कला परंपराओं का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने अपने चित्रों में प्रकृति के विविध रूपों, महिलाओं के मुद्दों, नदियों के महत्व और नारायणकुडी मंदिर की सुंदरता को बखूबी दर्शाया.
कलाकारों ने पर्यावरण प्रदूषण और नदी प्रदूषण जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भी अपनी कला के माध्यम से प्रकाश डाला, जो इस शिविर का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा.
भारत कला केंद्र के संपादक सौरभ बनर्जी ने बताया कि वे समय-समय पर इस तरह के कला शिविरों का आयोजन करते हैं. इस बार उन्होंने रानीगंज के ऐतिहासिक नारायणकुडी, मथुरा चंडी मंदिर परिसर को चुना ताकि इस क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा दिया जा सके.
उन्होंने यह भी बताया कि इस शिविर में बनी कलाकारों की विभिन्न तस्वीरों को भविष्य में आर्ट गैलरी में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि कला प्रेमियों को इन उत्कृष्ट कृतियों को देखने का अवसर मिल सके.
इस कला शिविर ने न केवल रानीगंज की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा को बढ़ाया है, बल्कि कलाकारों को भी एक मंच प्रदान किया है जहां वे अपनी रचनात्मकता को साझा कर सकते हैं और समाज को महत्वपूर्ण संदेश दे सकते हैं.



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