बांकुड़ा - ग्रामीण मेला के रूप में बांकुड़ा के केंजाकुड़ा का लोकप्रिय मुड़ी मेला आज भी लोगो को ललचाता है. वैसे तो हर जगह की लोक संस्कृति एवं संस्कार की अपनी अलग पहचान होती है तो वहीं बांकुड़ा जिले में खाने के व्यंजन के रूप में मुड़ी आलू बंडा का खाने का रिवाज है प्रायः हर घर में सुबह सबेरे लोगो मुड़ी चोप खाना नहीं भूलते .और अगर कहीं मुड़ी खाने को लेकर अगर कोई मेला लगता हो तो उसकी चाहत दुगुनी हो जाती है बांकुड़ा जिले के केंजाकुड़ा में द्वारकेश्वर नदी के किनारे लगने वाला लोकप्रिय मुड़ी मेला आज भी लोगो को ललचाता है एवम अपनी चाहत को लेकर खींच लाता है .मेला के आयोजन को लेकर कुछ पौराणिक कथा भी है जहां संजीवनी माता का मंदिर भी है जहा लोगो पूजा अर्चना करने आते है माघ महीने के पहले दिन से ही लोगोंका आना जाना लगा रहता है किन्तु चौथे माघ के दिन मुड़ी मेला लगता है जहा दूरदराज से लोगो को आना लगा रहता है आज इस मेले को आयोजन करने में कमेटी भी है जो इसकी देखरेख करती है प्रशासन के तरफ से भी सहयोग प्रदान किया जाता है आला अफसर से लेकर जन प्रतिनिधि तक साल में एक बार होने वाले मुड़ी मेला का आंनद लेने से नहीं चूकते.
बांकुड़ा का मुड़ी मेला में लोग उमड़ पड़टे है, पूरे दिन आलू बंडा , समोसा, चाट की बिक्री भी रोचक रूप में होती है









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