पश्चिम बंगाल के जामुड़िया में सुरों के बादशाह मोहम्मद रफी का 100वां जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया
जामुड़िया-जामुड़िया अंचल कमिटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में रफी साहब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. इस मौके पर उपस्थित पश्चिम बंग हिंदीभाषी समाज पश्चिम बर्धमान जिला कमिटी के सदस्य बिकास यादव ने रफी साहब को सुरों के बेताज बादशाह और कला जगत का अज़ीम शाहंशाह बताया.
बिकास यादव ने कहा, "रफी साहब ने देश की आजादी के बाद भारत में रहने का फैसला किया था, जो उनकी देशभक्ति का प्रतीक है.उनके देशभक्ति गीतों, भजनों, ग़ज़लों और कव्वालियों ने हमारी समाज पर गहरा प्रभाव डाला है."
उन्होंने आगे कहा, "रफी साहब के दर्द भरे गीत युवाओं के बीच आज भी बेहद लोकप्रिय हैं. उनके गीतों के बिना कोई भी संगीत कार्यक्रम अधूरा सा लगता है."
रफी साहब की जनसेवा के कार्यों को याद करते हुए बिकास यादव ने कहा, "रफी साहब बहुत ही हंसमुख और दरियादिल इंसान थे. उन्होंने कई फिल्मी गीत बिना किसी मोल के या बहुत कम पैसे में गाए थे."
इस कार्यक्रम में शंकर रवानी, एमडी शमशेर, पंचानन रवानी और रंजीत बिस्टू भी उपस्थित थे.










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