रानीगंज: राष्ट्रीय राजमार्ग 60 के किनारे स्थित अमृत कुंज आश्रम के सामने से बरदही जाने वाले रास्ते पर पुराने ग्लास फैक्ट्री के निकट कुछ किसानों की खड़ी फसल को जेसीबी से नष्ट कर दिया गया है. किसानों का आरोप है कि यह जमीन उनके पूर्वजों को मालिया राज परिवार के सदस्यों ने दी थी और वे पिछले 70 सालों से यहां खेती करते आ रहे हैं. किसानों का कहना है कि स्थानीय एक पूंजीपति के इशारे पर रानीगंज बोरो दो कार्यालय ने रानीगंज पुलिस प्रशासन की मदद से उनकी फसल को नष्ट किया है. इस दौरान रानीगंज बोरो दो कार्यालय के असिस्टेंट इंजीनियर कौशिक सेनगुप्ता और रानीगंज पुलिस थाना के अधिकारी भी मौजूद थे. किसानों का दावा है कि लगभग 50,000 रुपये की फसल नष्ट हुई है.
सरकारी अधिकारी का पक्ष: दूसरी ओर, रानीगंज बोरो दो के असिस्टेंट इंजीनियर कौशिक सेनगुप्ता का कहना है कि यह जमीन सरकारी है और यहां पर सांसद निधि से एक सरकारी वृद्ध आश्रम बनाने का प्रोजेक्ट चल रहा है. उनका आरोप है कि किसानों ने इस जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा था और उन्हें बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद उन्होंने जमीन खाली नहीं की.श्री सेनगुप्ता का यह भी कहना है कि किसान यहां पर केवल दो-तीन सालों से ही खेती कर रहे हैं.
किसानों ने बताया कि वे इस जमीन पर खेती करके अपना और अपने परिवार का गुजारा करते थे.इस घटना से वे बेहद परेशान हैं और उन्हें नहीं समझ आ रहा है कि अब वे क्या करेंगे.
सवालों के घेरे में प्रशासन: इस घटना ने स्थानीय प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.क्या वास्तव में यह जमीन सरकारी है? क्या किसानों ने अवैध रूप से कब्जा किया था? क्या प्रशासन ने किसानों को नोटिस दिए थे? इन सवालों के जवाब जानने के लिए स्थानीय लोगों में उत्सुकता है.यह मामला जमीन के स्वामित्व और किसानों के अधिकारों को लेकर एक गंभीर विवाद बन गया है. एक तरफ जहां किसान अपनी पुश्तैनी जमीन होने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि यह सरकारी जमीन है. इस विवाद का समाधान निकालना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी.
हालांकि यह मामला एक बार फिर से सरकार की भूमि अधिग्रहण नीतियों पर सवाल उठाता है की क्या सरकार किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए भूमि अधिग्रहण करती है? क्या किसानों को उचित मुआवजा दिया जाता है? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब तलाशने की जरूरत है.


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