जामुड़िया: जामुड़िया हिंदी हाई स्कूल के पूर्व शिक्षक डॉ. सुजीत कुमार साव को हाल ही में भारतीय रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया है.वर्तमान में, वे हुगली जिले के गोंदलपाड़ा शास्त्री हिंदी हाई स्कूल (उच्च माध्यमिक) में इतिहास विभाग में सहायक शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं.
डॉ. साव का मानना है कि अनुशासन और शिक्षा का गहरा संबंध है.वे कहते हैं कि अनुशासित जीवन जीने से व्यक्ति सफलता की ओर अग्रसर होता है. उनके विचारों ने छात्रों और सहकर्मियों दोनों पर गहरा प्रभाव डाला है.
शिक्षा को जीवन से जोड़ना
डॉ. साव शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखते हैं.उनके अनुसार, शिक्षा जीवन के हर पहलू में सीखने और विकसित होने का एक माध्यम है. वे अपने छात्रों को जीवन के हर पहलू में कुछ नया सीखने की प्रेरणा देते हैं.
डॉ. साव का मानना है कि अनुशासन व्यक्ति के जीवन को सुव्यवस्थित करता है और राष्ट्र के विकास में भी योगदान देता है. उनका प्रसिद्ध नारा "हर है अनुशासन है, और अनुशासन तो राष्ट्र का कल्याण है" इस बात को स्पष्ट करता है.
इतिहास और अनुशासन का गहरा संबंध
डॉ. साव का एक और महत्वपूर्ण नारा है, "तुम मुझे अनुशासन दो, मैं तुम्हें एक अथा इतिहास दूंगा". वे मानते हैं कि अनुशासन और इतिहास की गहरी समझ के बिना किसी भी समाज का भविष्य उज्ज्वल नहीं हो सकता.
डॉ. साव समाज के लोगों और छात्रों को एकता, नैतिकता और संगठन के महत्व को भी समझाते हैं. उनका नारा "एक रहो नेक रहो ओर संगठित रहो" इस विचारधारा का हिस्सा है.
शिक्षा के क्षेत्र में योगदान
डॉ. सुजीत कुमार साव ने शिक्षा के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए भारतीय रत्न सम्मान प्राप्त किया है. उनके प्रेरक विचार और शिक्षण शैली छात्रों और शिक्षकों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में काम करते हैं.
डॉ. सुजीत कुमार साव एक ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने न केवल अपने छात्रों के जीवन को बल्कि समाज को भी प्रभावित किया है। उनके विचारों ने अनुशासन, शिक्षा, एकता और नैतिकता के महत्व को रेखांकित किया है। वे एक आदर्श शिक्षक और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं.


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