रानीगंज: बिरसा मुंडा की जयंती समारोह और तीरंदाजी प्रतियोगिता की तैयारियों में जुटा बंसरा गांव इन दिनों आदिवासी कला का अद्भुत नजारा पेश कर रहा है.गांव की महिलाएं पिछले तीन दिनों से लगभग दो किलोमीटर लंबी सड़क को रंग-बिरंगे अल्पनाओं से सजा रही हैं. ये अल्पनाएं सिर्फ सजावट नहीं बल्कि आदिवासी संस्कृति और जीवनशैली की कहानियां बयां कर रही हैं.
सड़कों पर उकेरी गईं अल्पनाओं में आदिवासी समुदाय की पारंपरिक वेशभूषा, नृत्य, वाद्य यंत्र जैसे धमसा, मादल, तीर-कमान, और पुष्प डिजाइन प्रमुख रूप से दिखाई दे रहे हैं. बुजुर्गों से लेकर युवा महिलाओं तक सभी ने मिलकर इस कलात्मक कार्य को अंजाम दिया है.
क्यों बनाई जा रही हैं ये अल्पनाएं?
गांव की महिलाओं का मानना है कि इस आयोजन में दूर-दूर से हजारों लोग आएंगे.इसलिए उन्होंने गांव को एक अनोखा रूप देने का फैसला किया. ये अल्पनाएं न सिर्फ मेहमानों का स्वागत करेंगी बल्कि आदिवासी संस्कृति के प्रति लोगों का ध्यान भी आकर्षित करेंगी.
तीरंदाजी प्रतियोगिता में महिलाओं की भागीदारी
इस साल की तीरंदाजी प्रतियोगिता में कई महिलाएं भी भाग ले रही हैं. महिलाओं ने इस खास पहल को महिला प्रतियोगियों के स्वागत के लिए समर्पित किया है.
बाँसड़ा फुटबॉल मैदान में आयोजित होने वाले इस समारोह में तीरंदाजी प्रतियोगिता के अलावा आदिवासी नृत्य, राम मांडी और जया हासदा की प्रस्तुतियां भी होंगी.


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