रानीगंज-मोहल्ले के बीच बने कुएं पर माँ काली का अस्थायी मंदिर बना था. कुएं पर ही काली पूजा से पहले काली की मूर्ति स्थापित की गई . रानीगंज के हिल बस्ती मोड़ पर एक सरकारी कुआं है, उस कुआं को इलाके के लोगों ने सुरक्षा के नजरिए से ढक दिया था. उसी पर लंबे समय से छोटे स्तर पर काली पूजा होती रही है. कभी ताड़ के पत्तों से तो कभी महिलाओं की साड़ियों का इस्तेमाल कर मंडप बनाया जाता था , बाद में पूजा के लिए डेकोरेटर द्वारा पंडाल बनाया जाने लगा. इसके बाद इलाके के बुजुर्गों ने इलाके की पानी की मांग पूरी होने और इस कुंवे की आवश्यकता न समझे जाने पर इस कुएं पर एक मंदिर स्थापित करने की पहल की, और वह मंदिर श्री श्री महामाया काली मंदिर के रुप में स्थापित हुई. 1988 के आसपास यहां के लोगों द्वारा यहां मंदिर का निर्माण कराया गया, था चूंकि मंदिर पिछले कुछ वर्षों में जीर्ण-शीर्ण हो गया था, कुएं के कोने पर स्थित श्री श्री महामाया काली मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया है और उस मंदिर में श्री महामाया काली की मूर्ति स्थापित की गई है. मंगलवार की संध्या बहुत धूमधाम के साथ, क्षेत्र की प्रसिद्ध महिला ढाकी मंडली ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, साथ ही स्थानीय कलाकारों द्वारा गाये भजन ने मंदिर की स्थापना समारोह को अभिभूत कर दिया.इलाके के हजारों धार्मिक लोगों ने प्रातः रानीगंज के चिनकुठी चौराहे से एक शोभायात्रा निकाला और कुमार बाजार के नंदीपुकुर से पवित्र जल एकत्र किया और उसे मंदिर में स्थापित किया.इसके बाद होम यज्ञ पूजा के साथ मां काली की प्रतिमा स्थापित करने का अनुष्ठान शुरू हुआ. मंदिर के अंदर देवी दुर्गा की मूर्ति स्थापित के अलावा उनके पास में बामदेव ,स्वामी विवेकानन्द रामकृष्ण परमहंसदेव और मां शारदा की मूर्तियां भी हैं और इन सबके बीच मां काली की भी मूर्ति है. मंदिर के एक छोर पर लक्ष्मी गणेश सरस्वती, एक छोर पर मां अन्नपूर्णा, एक छोर पर भगवान शिव और मां पार्वती और दूसरी तरफ अर्जुन और श्री कृष्ण हैं, मंदिर के पांचवें कोने पर पंचमुखी हनुमान विराजमान हैं.काली पूजा से पहले माँ काली को नमन करने के लिए इस मंदिर निर्माण को लेकर भक्तों की भारी भीड़ देखी गई. अब इलाके के लोगों को इंतजार है तो सिर्फ काली पूजा का.


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