जामुड़िया-जामुड़िया बोरो एक अन्तर्गत वार्ड संख्या एक के नंदी ग्राम के बाबू पाड़ा के बनर्जी परिवार का 450 साल से अधिक पुरानी लक्ष्मी पूजा,इस बार भी बहुत धूमधाम से मनाई गयी. इस मंदिर में 40 किलो वजनी अष्टधातु से बनी माँ लक्ष्मी मूर्ति की पूजा की जाती है . इस मूर्ति का अस्सी प्रतिशत हिस्सा सोने का है .लक्ष्मी पूजा के दिन ही इस मूर्ति को मंदिर में लाया जाता है, और पूजा की जाती है .इस दिन प्रतिमा की सुरक्षा के लिए पुलिस कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहती है. नंदी ग्राम के बनर्जी परिवार के बारहवें पुरुष राम किंकर बनर्जी को मां लक्ष्मी की सपना मिलने के बाद लक्ष्मी पूजा शुरू की थी. यह पूजा पहले राम किंकर बनर्जी के घर पर 70 साल पहले की जाती थी .परिवार के सदस्यों ने घर के नजदीक एक विशाल लक्ष्मी मंदिर बनाया. इस मंदिर का उपयोग मां लक्ष्मी की पूजा के लिए किया जाता है .बनर्जी परिवार के एक सदस्य के अनुसार बनर्जी परिवार के बारहवें पुरुष राम किंकर बनर्जी विभिन्न व्यवसायों से जुड़े थे. उस समय उनका व्यवसाय बहुत अच्छा नहीं था. उस समय राम किंकर बनर्जी का विवाह शैवलिनी देवी के साथ होने के बाद उनका व्यापार आगे बढ़ा. राम किंकर बाबू अपनी पत्नी को ही घर की लक्ष्मी कहते थे. उन्होंने कहा कि उसी समय राम किंकर बनर्जी को लक्ष्मी पूजा करने का सपना आया, तभी से लक्ष्मी पूजा की शुरुआत मानी जाती है .राम किंकर बनर्जी अपनी पत्नी से इतना प्रेम करते थे कि बुढ़ापे में उन्होंने उनके कहे अनुसार उन्हें वृन्दावन में रखा और वहीं उनकी पत्नी की मृत्यु हुई. उमके पास इतनी संपत्ति थी कि ब्रिटिश सरकार उन्हें रॉय की उपाधि देना चाहती थी लेकिन उन्होंने यह उपाधि लेने से इनकार कर दिया. उस समय उन्होंने जालियावाला बाग हत्याकांड का विरोध किया था, जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने उन्हें बाबू कहकर संबोधित किया.पूर्व में लक्ष्मी पूजा के अवसर पर मंदिर परिसर में कोलकाता के प्रसिद्ध कीर्तनिया दलों द्वारा कीर्तन किया जाता था. वर्तमान में यह पूजा बनर्जी परिवार के गौतम बनर्जी और शंभू बनर्जी द्वारा आयोजित की जाती है.


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