रानीगंज-हिंदू धर्म में सावन का विशेष महत्व है.यह महीना भगवान शिव को आराध्य करने की माह मानी जाती है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने भक्त की मनोकामना पूरी होती है. इसके साथ ही सावन के सोमवार व्रत रखने से भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है.सावन महीने की शुरुआत होते ही शिव पर जल चढ़ाने वाले भक्तों पर गेरूआ रंग चढ़ा हुआ नजर आ रहा है. एक और जहां शिव भक्त कांवर लेकर भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए देवघर के बैद्यनाथ धाम के लिए निकल पड़े हैं,वहीं दूसरी ओर रानीगंज के रानीसायर स्तिथ जोड़ा महादेव के मंदिर में लगभग 13 किलोमीटर दूर दामोदर नदी से पानी लेकर हर हर महादेव के जय घोष के साथ मन्दिर में सोमवार रात्रि से बाबा कामेश्वर नाथ एवं बाबा सिधेश्वर नाथ पर जलाभिषेक करते है. सारी रात बाबा का भक्तो में गजब का उत्साह देखते बनता है.
इस बारे में मंदिर के पुरोहित भूदेव गिरि से बात की तो उन्होंने बताया कि पिछले 55 सालों से वह यहां पर पूजा अर्चना करते आ रहे हैं
इससे पहले रुद्र पुरी बाबा यहां पर पूजा अर्चना किया करते थे. इस मंदिर का निर्माण तकरीबन 350 साल पहले यहां के तपादार जमींदार परिवार ने किया था. इस मंदिर को लेकर लोगों में काफी आस्था है लोग इसे काफी जागृत मंदिर मानते हैं और ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में हर सोमवार को अगर कोई सच्चे मन से यहां पर देवाधिदेव महादेव की आराधना करें तो उसके हर मनोकामना पूरी होती है .मंदिर की अलौकिक शक्तियों के बारे में बताते हुए पंडित भूदेव गिरि ने बताया कि यहां पर नागराज अपने भक्तों को दर्शन देते हैं .यहां साल के विभिन्न समय धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है चैत के महीने में मंदिर में गाजन मेले का आयोजन होता है चार दिवसीय इस मेले के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर में उमड़ते हैं .इसके अलावा कार्तिक महीने में भी 24 घंटे के अखंड पाठ का आयोजन होता है. यहां कामेश्वर एवं सिधेश्वर महादेव के अलावा माता पार्वती भगवान गणेश भैरवनाथ की भी पूजा होती है.सावन माह के प्रत्येक रविवार की रात दामोदर नदी से कांवरिया जल लेकर यहां पहुंचते है, जगह -जगह स्वंय सेवी संस्था चाय,पानी नाश्ते की व्यवस्था करते है. उन्होंने बताया कि मंदिर के देखभाल के लिए कोई ट्रस्ट नहीं है मंदिर का आज जो भी कलेवर बढ़ा है वह यहां के श्रद्धालुओं की देन है.


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