रानीगंज-सांस्कृतिक संस्था गंधर्व कला संगम की तरफ से मंगलवार को रानीगंज के शिशु बागान इलाके स्तिथ कार्यालय में एक बैठक का आयोजन किया गया. इस बैठक में यह फैसला लिया गया कि हर साल की तरह इस साल भी 13 जून यानी गुरुवार को नारायण कुड़ी मथुरा चंडी हेरीटेज स्थल में रविंद्र नजरुल संध्या का आयोजन किया जाएगा. इस संदर्भ में इस संस्था की संस्थापक शाश्वती चटर्जी ने कहा के रवींद्रनाथ टैगोर और काजी नज़रुल इस्लाम दोनों का ही संबंध रानीगंज की धरती से रहा है .यह दोनों ही बंगाल के महान सपूत हैं .इन दोनों को श्रद्धांजलि देते हुए हर साल की तरह इस साल भी संस्था की तरफ से इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा .उन्होंने कहा कि इस संस्था का गठन नई पीढ़ी को बंगाल के धरोहर और संस्कृति के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए किया गया था .उन्होंने कहा कि उनके संस्था का उद्देश्य यही है कि नारायण कुड़ी एक धरोहर के रूप में स्वीकृती मिले और संस्था की तरफ से इसके लिए लगातार प्रयास किया जाता रहा है. उन्होंने कहा कि यही उद्देश्य है कि गंधर्व कला संगम की तरफ से हर साल इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है .सचिव सुशील गनेरीवाला ने कहा कि इस कार्यक्रम के दौरान समाज के पिछड़े और आदिवासी समाज के बच्चों को विशेष महत्व दिया जाएगा. नारायण कुड़ी बंगाल ही नहीं पूरे भारत का एक ऐतिहासिक स्थल है .क्योंकि यही वह जगह है जहां पर कर एंड टैगोर कंपनी के नाम से पहले कोयला खदान की शुरुआत की गई थी .उन्होंने कहा कि यही वजह है कि वह लोग चाहते हैं कि इस धरती को वह सम्मान मिले जिसकी यह धरती हकदार है. उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य को लेकर उनके संस्था पिछले 22 सालों से यहां पर अनवरत काम कर रही है. इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष प्रदीप नदी हरि सोमानी गोविंद लोहिया प्रमुख रूप से उपस्थित थे.



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