रानीगंज-स्पीच एंड हियरिंग एक्शन सोसाइटी (साहस) दुर्गापुर तथा नंदलाल जालान फाउंडेशन रानीगंज के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को रानीगंज चेंबर ऑफ कॉमर्स के निकट संस्था के प्रांगण में वधिर सचेतनता शिविर का आयोजन किया गया. जहां 49 बधिर व्यक्तियों की निशुल्क जांच की गई ,इसके साथ ही 25 बधिर व्यक्तियों को निशुल्क हियरिंग एड प्रदान किया गया. आपको बता दें की स्पीच एंड हियरिंग एक्शन सोसाइटी ( साहस) पिछले लंबे समय से मुक बधिर बच्चों को समाज के मुख्य धारा में शामिल करने के दिशा में कार्यरत है. इसके साथ ही जिन व्यक्तियों को सुनने में तकलीफ होती है उनको भी इस संगठन की तरफ से समय-समय पर निशुल्क हियरिंग एड प्रदान किया जाता है. आज ऐसे 25 व्यक्तियों को निशुल्क हियरिंग एड प्रदान किया गया और 49 व्यक्तियों की जांच की गई 14 जून को भी ऐसा ही एक कार्यक्रम किया जाएगा जहां पर 30 लोगों की जांच की जाएगी और बाकी बचे 20 लोगों को ही निशुल्क हियरिंग एड भी प्रदान किया जाएगा.इस अवसर पर नन्द लाल जालान फाउंडेशन के ट्रस्टी सह साहस से जुड़े ललित कयाल ने बताया कि साहस नामक संगठन को दुर्गापुर के समाजसेवी शंभू नाथ जाजोदिया और उनकी पत्नी प्रोफेसर मधुमिता जाजोदिया लंबे समय से चला रहे हैं,दरअसल यह दंपति समाज के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं क्योंकि उनके पुत्र अंशु जाजोदिया भी जन्म से बोल और सुन नहीं पाते थे लेकिन इन्होंने अपने बेटे का इलाज अमेरिका में करवाया और आज वह दुर्गापुर के एक कॉलेज में प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत है .इसके बाद शंभुनाथ जाजोदिया और उनकी पत्नी प्रोफेसर मधुमिता जाजोदिया ने इस प्रयास को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया और उन्होंने आज तक सैकड़ो ऐसे बच्चों और व्यक्तियों को जीवन की मुख्य धारा से जोड़ा है जो बोल और सुन नहीं पाते थे .इस संस्था के कर्णधारों को भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम द्वारा सम्मानित भी किये जा चुके है. आज के इस कार्यक्रम को करने की दिशा में नंदलाल जालान फाउंडेशन के भी अहम भूमिका रही. इस मौके पर यहां फाउंडेशन की तरफ से ट्रस्ट बोर्ड से जुड़े राजेंद्र प्रसाद खेतान, ओम प्रकाश बाजोरिया और ललित कयाल सहित फाउंडेशन के तमाम सदस्यों उपस्थित थे. ललित कयाल ने बताया कि साहस नामक संगठन का मुख्य उद्देश्य है कि जो लोग बोल और सुन नहीं सकते उनके वैज्ञानिक तरीके से इलाज किया जाए ताकि वह जीवन के मुख्य धारा से जुड़ सके. इस बारे में प्रोफेसर मधुमिता जाजोदिया ने बताया कि उनके संस्था में विशेषज्ञों की मदद से विशेष कर उन बच्चों का इलाज किया जाता है जो जन्म से बोल और सुन नहीं सकते उन्होंने कहा कि एक बच्चा अगर 1 साल की उम्र तक बोल नहीं पा रहा है तो देर ना करके उनके संस्था के साथ संपर्क करें उनके संस्था दुर्गापुर के बिधाननगर में मिशन हॉस्पिटल के पीछे कार्यरत है. उन्होंने बताया कि अगर कोई बच्चा 5 साल तक बोल नहीं पता तो भविष्य में उसके बोलने की संभावना काफी कम हो जाती है क्योंकि एक बच्चा 5 साल तक ही बोलना सीख पाता है. इसलिए यह बहुत जरूरी है कि अगर किसी बच्चे को बहुत कम उम्र में ही बोलने में असुविधा हो रही है तो उसका सही तरीके से इलाज कराया जाए उनके संस्था में विशेषज्ञ द्वारा ऐसे बच्चों का इलाज कराया जाता है ताकि वह सुनने के साथ-साथ बोलने की भी शक्ति प्राप्त कर सके .उन्होंने बताया कि अब तक ऐसे बच्चों का इलाज उनके संस्था में किया जा चुका है वहीं उन्होंने कहा कि बुजुर्गों में भी सुनने की शक्ति कम हो जाती है जो की उम्र की वजह से होती है ऐसे में वह समाज से कट जाते हैं ,ऐसी स्थिति में आसपास के लोगों की यह जिम्मेदारी है कि वह ऐसे लोगों के साथ रहे और ऐसे बुजुर्गों के लिए भी एक मशीन है जो उनके सुनने की तकलीफ को काफी हद तक दूर कर सकती है.


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