जामुड़िया के पूर्व विधायक जहाँआरा खान को वामफ्रंट ने उतारा आसनसोल लोकसभा सीट पर,कट सकती है तृणमूल कांग्रेस की अल्पसंख्यक वोट







 जामुड़िया-आने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों की तरफ से सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं. आसनसोल लोकसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर शत्रुघ्न सिन्हा के नाम पर मोहर लगा दी है ,वहीं भारतीय जनता पार्टी की तरफ से पहले पवन सिंह के नाम की घोषणा की गई थी, लेकिन पवन सिंह द्वारा अपना नाम वापस लेने के उपरांत अभी तक भाजपा द्वारा किसी नए प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की गई है.गुरुवार को वाम फ्रंट द्वारा आसनसोल लोकसभा सीट से उनके प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दी गई ,यहां से जमुड़िया की पूर्व विधायक जहांआरा खान चुनाव लड़ेंगी. आपको बता दें कि जहांआरा खान जमुरिया की विधायक रह चुकी हैं ,और उनकी पहचान एक जुझारू नेत्री के रूप में है. एक तरफ जहां आसनसोल लोकसभा केंद्र में टीएमसी और भाजपा के बीच सीधी टक्कर होने की उम्मीद है वही जहांआरा खान के नाम की घोषणा से लेफ्ट फ्रंट भी मुकाबले में लौटता नजर आ रहा है ,जहां शत्रुघ्न सिन्हा के खिलाफ आज भी बाहरी होने के आरोप लगते रहे हैं, वहीं भाजपा की तरफ से भी पवन सिंह को चुनावी मैदान में खड़ा करके भाजपा ने पहले ही यह संकेत दे दिया है कि उनकी भी मंशा आसनसोल से किसी बाहर के व्यक्ति को यहां से चुनाव लड़वाने की है .ऐसे में जहांआरा खान के नाम की घोषणा निश्चित रूप से एक ऐसा कदम है जिससे लेफ्ट फ्रंट द्वारा स्थानीय मतदाताओं को यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि लेफ्ट फ्रंट ही एकमात्र ऐसी राजनीतिक शक्ति है जो यहां के लोगों की परेशानियों को सही मायने में समझती है और यही वजह है कि उन्होंने जामुड़िया की जुझारू नेत्री जहांआरा खान को आसनसोल लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है,

हालांकि आसनसोल लोकसभा सीट से वाममोर्चा उम्मीदवार के तौर पर वंश गोपाल चौधरी,गौरंगो चटर्जी समेत कई दावेदारों के नाम के चर्चे थे. जहाँआरा खान ने वर्ष 2016 में जामुड़िया विधानसभा से तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी वी शिवदासन दासु को 7 हजार से अधिक वोटो से हराया था.

जहाँआरा खान जामुड़िया विधान सभा क्षेत्र की केंदा अंचल की रहने वाली है.उनका जन्म जून 1965 में हुआ था,वह विवाहित है,एवं माकपा पूर्णकालिक सदस्या है.माना जा रहा है जहाँआरा खान को वामफ्रंट ने खड़ा करके तृणमूल कांग्रेस की वोट को काटेगी, विशेष कर अल्पसंख्यको का वोट उन्हें मिलने की उम्मीद है. उनके उम्मीदवार बनने के वाद अब यह देखना दिलचस्प रहेगा कि कभी लेफ्ट फ्रंट का गढ़ कहलाने वाले आसनसोल संसदीय क्षेत्र में क्या जहांआरा खान के जरिए लेफ्ट फ्रंट एक बार फिर अपनी खोई जमीन वापस पा सकती है.वहीं जहाँआरा खान की उम्मीदवारी की घोषणा होते ही माकपाईयों ने जोर -शोर से दीवाल लेखन आरम्भ कर दिया है.

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