रानीगंज- वृंदावन धाम समिति वासियों ने धूम -धाम से मनाया लोहड़ी पर्व.इस अवसर पर गुलशन अरोड़ा के नेतृत्व में लोगो ने मंगलम अपार्टमेंट परिसर में परम्परा के अनुसार लकड़ी की अलाव जला कर एवं उसके चारो तरफ परिक्रमा कर लोहड़ी के आनंद उठाये.
इस अवसर पर प्रोफेसर स्वदेश मजूमदार,डॉ मनोज,सुंदर सिंह,मुन्ना गोयल सहित मुहल्ले की महिलाएं शामिल थी.
ज्ञात हो कि में पंजाब के लोग सर्दियों के मौसम का अंतिम पड़ाव पर आना और फसलों के मौसम के आगमन का स्वागत करने की खुशी में लोहड़ी का त्यौहार मनाते हैं. यह त्यौहार नई शुरुआत को दर्शाता है. लोहड़ी का त्यौहार को अलाव के साथ मनाया जाता है.हालांकि वहां परंपरागत रूप से इसकी तैयारी लगभग एक या दो सप्ताह पहले से शुरू हो जाती है, जहां किशोर लड़के और लड़कियां अलाव के लिए उपले बनाने के लिए गाय का गोबर और टहनियां इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं, लोहड़ी वाले दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं और अलाव जलाने के लिए उसके चारों ओर इकट्ठा होते हैं. लोग अलाव के सामने प्रार्थना करते हैं और उसमे तिल, मूंगफली और चूरा डालते हैं क्योंकि इन सभी खाद्य पदार्थों को लोहड़ी का प्रसाद माना जाता है. इस दिन पुरुष और महिलाएं खूब नाचते गाते हैं जिसमें पारंपरिक गीत और भांगड़ा और गिद्दा कर के लोग अपनी खुशी जाहिर करते हैं,लोग एक–दूसरे को लोहड़ी की शुभकामनाएं देते हैं. इसके आलावा लोहड़ी के दिन, स्वादिष्ट भोजन पकाया जाता है जिसमें मुख्य रूप लोहड़ी विशेष भोजन ‘सरसों का साग‘ और ‘मक्की की रोटी‘ और खीर, आटे के लड्डू के साथ–साथ कई अन्य व्यंजन बनाए और खिलाए जाते हैं. यह त्यौहार उन लोगों के लिए बहुत अहमियत रखता है, जो नवविवाहित हों या घर परिवार में जिस बच्चे की यह पहली लोहड़ी होती है इस दिन लोग अपने परिवार और करीबियों को खाने के लिए आमंत्रित करते हैं और एक दूसरे को उपहार देते हैं. लोहड़ी पर, लोग सूखे मेवे, रेवड़ी, चीनी, तिल और भुनी हुई मूंगफली से बनी मिठाई का भोग लगाते हैं.तिल के लड्डू और अन्य खाद्य पदार्थों को सब बारी–बारी आग में डालने के बाद एक साथ इकट्ठा होते हैं और त्यौहार का जश्न मनाते हैं. गुलशन अरोड़ा ने बताया कि लोहड़ी का त्यौहार अब पंजाब के ग्रामीण इलाकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब शहरों, यहां तक की बहुत सारे राज्यों में भी यह मनाया जाने लगा है, शहरवासी भी पूरी परंपरा के साथ त्यौहार को मनाते हैं. यह त्यौहार ही तो हैं जो हमें समय समय पर अपनों के होने की अहमियत बताते हैं. भारत को एक महान देश इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यह अनेकता में भी एकता का प्रतीक है. इसलिए यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हम उस देश के नागरिक हैं विविध संस्कृतियों का धनी है.यह परंपरा मंगलम अपार्टमेंट में वर्षो से मनाई जा रही है.


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