रानीगंज -बंगाल के महान साहित्यकार माइकल मधुसूदन दत्ता की 200वीं जयंती के अवसर पर रानीगंज के राम बगान में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया. इसके बारे में जानकारी देते हुए पश्चिम बंग गणतांत्रिक लेखक शिल्पी संघ के सदस्य अनूप मित्रा ने जानकारी दी कि माईकल मधुसूदन दत्ता ने अंग्रेजी साहित्य का अध्ययन किया था ,लेकिन बेथुन साहब ने उनका बंगला में साहित्य रचना करने के लिए उत्साहित किया. इसके बाद उन्होंने बंगाल में कविताएं लिखना शुरू किया. उन्होंने बंगाल में कविता लिखने की शैली में परिवर्तन लाया. पहले जिस शैली में बांग्ला कविताएं लिखी जाती थी उसे उलट उन्होंने अंग्रेजी साहित्य से प्रेरित होकर अंग्रेजी कविता लिखने की शैली में बांग्ला कविताएं लिखना शुरू किया .उन्होंने बड़े-बड़े काव्य लिखे और उन्होंने बंगाल के साहित्य प्रेमियों के सोचने के तरीके में बदलाव आया. पुराने मेघनाद वध काव्य की रचना की, जिसमें उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के बजाय मेघनाद को अपनी रचना का नायक बनाया, हालांकि उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के प्रति भक्ति में कमी नहीं आने दिया, उन्होंने एक अलग नजरिया पेश करते हुए अपने काव्य में मेघनाद को नायक बनाया.


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