रानीगंज- गुरुवार से रानीगंज के सियारसोल मैदान में रानीगंज पुस्तक मेला कमिटी की तरफ से पश्चिम बंगाल सरकार के जनशिक्षा प्रसार तथा ग्रंथागार विभाग के सहयोग से पुस्तक मेले का उद्घाटन हुआ. हालांकि इस बार भी हिंदी और ऊर्दू भाषा की स्टाले नदारद हैं, हालांकि आयोजको का दावा है की मेला में उर्दू तथा हिंदी की स्टाले लगी है,पर उद्घटान तक यह स्टाले नहीं लगी थी. 4 जनवरी से 10 जनवरी तक चलने वाली इस पुस्तक मेला के उद्घाटन के पूर्व शहर के विभिन्न स्कूलो के विद्यार्थियों ने एनएसबी रोड स्थित स्पोर्ट्स असेंबली परिसर से एक रैली निकाली, इसमें शामिल विद्यार्थियों ने हाथों में तख्तिया थाम रखी थी, जिनपर सेफ ड्राइव सेव लाइफ, पेड़ लगाओ सहित विभिन्न संदेश लिखे थे . एसीपी सेंट्रल 2 श्रीमंत बैनर्जी, रानीगंज थाना प्रभारी सुदीप दासगुप्ता तथा रानीगंज ट्रैफिक ओ सी चित्ततोष मंडल की निगरानी में यह रैली सियारसोल मैदान में पुस्तक मेला प्रांगण तक पंहुची. इस पुस्तक मेले के दौरान राज्य के ग्रंथागार मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी ,रानीगंज के विधायक तापस बैनर्जी, आसनसोल नगर निगम के मेयर विधान उपाध्याय ,चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी ,डेप्युटी मेयर वसीम उल हक़, जिला शासक एस पोनाबलम, रामकृष्ण मिशन के महाराज स्वामी सौमतमानंद जी महाराज विशेष अतिथि के रूप ने उपस्थित थे. उनके अलावा रानीगंज पुस्तक मेला कमिटी के अध्यक्ष डॉ बीबी मुखर्जी ,महासचिव जुगलकीशोर गुप्ता सचिव विश्वनाथ बनर्जी भी उपस्थित थे. पुस्तक मेला कमेटी की तरफ से सभी आमंत्रित अतिथियों का स्वागत किया गया इसके उपरांत दीप प्रज्वलित कर पुस्तक मेले का शुभारंभ हुआ. यहां पर काजी नज़रुल इस्लाम के जीवन और उनके कार्यों को लेकर एक स्टॉल लगाया गया है. उस स्टॉल का भी फीता काटकर मंत्री ने उद्घाटन किया. रानीगंज के इस पुस्तक के मेले में आयोजक समिति का कहना है कि मेले में 84 स्टाले लगाई गयी है, करीब 40 पुस्तको की स्टाल लगाए गए हैं,हालांकि की उद्घटान के समय अधिकांश स्टाले खाली रही. कार्यक्रम के दौरान अपना वक्तव्य रखते हुए सिद्धकुल्ला चौधरी ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुस्तकालयों को विकसित करने के लिए काफी प्रयास कर रही हैं .इस दिशा में कई का कदम भी उठाए जा रहे हैं . बहुत जल्द ग्रंथागार विभाग की तरफ से कई स्थाई नौकरियां की व्यवस्था की जाएगी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासनकाल में पहली बार ऐसा हो रहा है कि अगर कोई पुस्तकालय अपने आप को और विकसित करना चाहता है तो वह जरूर ग्रंथागार मंत्रालय से संपर्क करें ,उसकी हर संभव सहायता की जाएगी. उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में कंप्यूटर लगाने के बारे में भी सोचा जा रहा है, ताकि जिनके घरों में कंप्यूटर नहीं है ऐसे छात्र भी पुस्तकालय में आए और वह प्रतियोगिता मूलक परीक्षाओं के लिए खुद को तैयार करें. उन्होंने बच्चों से ज्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के पास मोबाइल कंप्यूटर नहीं था. उन्होंने किताबों को ही अपना जीवन बनाया और वह भारत के राष्ट्रपति बने. महान वैज्ञानिक बने ,वहीं इसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए भी सिद्धिकल्ला चौधरी ने अपनी बातें रखते हुए कहा कि पुस्तक मेले में 10% संरक्षण हिंदी और उर्दू तथा अन्य भाषा के पुस्तकों के लिए रखा गया है, अगर कोई इच्छुक व्यक्ति स्टॉल लगाना चाहता है तो उसका स्वागत है. उन्होंने कहा कि इस राज्य में सभी को अपनी तरह से विकास करने का अधिकार प्राप्त है .उन्होंने कहा कि किताबों के साथ बंगाल के संस्कृति जुड़ी हुई है यहां के लोग किताबें पढ़ना पसंद करते हैं और किताबें पढ़कर ही अपने आप को विकसित करते हैं. इसलिए किताबों के प्रति लोगों का रुझान पैदा करना अति आवश्यक है.











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