रानीगंज- रानीगंज के लायंस कम्युनिटी सभागार में रविवार को दिवंगत वामपंथी श्रमिक नेता और पूर्व सांसद आर सी सिंह की पहली पुण्यतिथि पर एक स्मरण सभा का आयोजन किया गया. इस सभा का आयोजन कोलियरी मजदूर सभा ( सीएमएस) आसनसोल ए आई टी यू सी द्वारा किया गया था. इस सभा में ए आई टी यू सी की अखिल भारतीय महासचिव अमरजीत सिंह कौर, संगठन की पश्चिम बंगाल की संयुक्त महासचिव लीना चक्रवर्ती, कोलियरी मजदूर सभा के महासचिव गुरुदास चक्रवर्ती, अध्यक्ष प्रभात राय, सीएमएस के कार्यकारी अध्यक्ष गोपाल शरण ओझा, सीएमएस के संयुक्त सचिव अनिल सिंह तथा शैलेंद्र सिंह सहित संगठन के तमाम सदस्य उपस्थित थे. जब अमरजीत सिंह कौर यहां पर पहुंची तो फूलों का गुलदस्ता देकर उनको सम्मानित किया गया इसके उपरांत सभागार के अंदर सभी आमंत्रित अतिथियों को पुष्पगुच्छ तथा उत्तरीय देकर सम्मानित किया गया .सभी विशिष्ट व्यक्तियों ने दिवंगत आरसी सिंह की तस्वीर पर माल्यार्पण किया. इसके उपरांत श्रमिक आंदोलन में आर सी सिंह के योगदान को याद किया गया.
इस संदर्भ में अमरजीत सिंह कौर ने कहा कि श्रमिक आंदोलन में आरसी सिंह का इतिहास स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा. उन्होंने बेहद शुरुआती दौर से ही श्रमिक आंदोलन में अपना नाम लिखाया था .एक कर्मी के रूप में उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत की थी. इस वजह से वह श्रमिकों के दर्द को अच्छी तरह से समझते थे .इसलिए वह अपने शुरुआती दिनों से ही श्रमिक आंदोलन से जुड़ गए. जब खदानें निजी हाथों में हुआ करती थी ,तब श्रमिकों की बातों को सामने रखने के लिए श्रमिक नेताओं पर काफी अत्याचार और हमले हुआ करते थे. आरसी सिंह को भी इन सब चीजों का सामना करना पड़ा, लेकिन वह कभी श्रमिक हितों की रक्षा करने से विचलित नहीं हुए. उन्होंने कहा कि जब 70 के दशक में एटक की मांग के अनुसार खदानों का राष्ट्रीयकरण किया गया तब श्रमिकों को कुछ अधिकार प्राप्त हुए, लेकिन इसके बाद भी श्रमिकों के लिए आरसी सिंह का संघर्ष जारी रहा. यूं तो 1922 में ही ऐटक के संघर्षों की वजह से माइन्स एक्ट बना. 1923 में कंपनसेशन एक्ट बना, लेकिन इन नियमों के विस्तार के लिए संगठन द्वारा अनवरत संघर्ष जारी रहा, जिसमें आरसी सिंह की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही. आज इसी का परिणाम है कि खदान श्रमिकों को पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सुविधाएं मिल रहे हैं ,लेकिन संघर्ष अभी भी जारी है. वहीं केंद्रीय सरकार पर करारा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संपत्ति को जिस तरह से निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की जा रही है उससे देश का नुकसान होगा. उन्होंने बताया कि एटक इसके खिलाफ आंदोलन करता रहा है और आगे भी उनका यह आंदोलन जारी रहेगा. राष्ट्रीयकरण की वजह से पब्लिक सेक्टर काफी आगे बढ़ा, लेकिन आज उल्टी गंगा बहाने की कोशिश की जा रही है ,वही नई शिक्षा नीति को भी आड़े हाथों लेते हुए अमरजीत सिंह कौर ने कहा की नई शिक्षा नीति की वजह से मध्यम वर्ग से नीचे के तबके के जो लोग हैं वह अपने बच्चों को पढ़ा नहीं पाएंगे. यहां तक की मध्यम वर्ग के लिए भी उच्च शिक्षा काफी मुश्किल हो जाएगी, तकनीकी शिक्षा भी मध्यम वर्ग के सामर्थ्य से बाहर चली जाएगी. यह बड़े अफसोस की बात है कि केंद्र की नई शिक्षा नीति को कुछ राज्यों द्वारा प्रश्रय दिया जा रहा है . अगर केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियां जन विरोधी हुई तो उनका संगठन उनका विरोध करेगा और जो संगठन वर्तमान में नई शिक्षा नीति का विरोध कर रहे हैं ऐटक उनके साथ है इसको लेकर अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनको आंदोलन जीवी कहते हैं तो कहें जनता के हित में आंदोलन करने से वह परहेज नहीं करेंगी. अमरजीत कौर ने 2024 के लोकसभा चुनाव के पूर्व जितने भी संस्थानों में अभी एटक की संगठन है उन संगठनों को मजबूती प्रदान करने, साथ ही साथ जहां एटक का संगठन नहीं है उन संस्थानों में अभी से संगठन की नींव डालकर संगठन को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं में जोश भरी.उन्होंने कहा कि 2024 के टर्म में अगर मोदी की सरकार आती है तो फिलहाल पूरे देश अभी तो कठिन परिस्थिति से गुजर रही है और अधिक मुश्किल हालात पैदा हो जाएगी. इसराइल और अमेरिका जैसे देशों का बोलबाला हमारे देश में हो जाएगी. जितने भी सरकारी संस्थाएं हैं, सभी बेचने पर तुली भी है यह सरकार . एक टर्म और मोदी सरकार आ गई तो देश की कोई भी सरकारी संस्थाएं बचने वाली नहीं है.देश की 22 प्रतिशत अर्थ व्यवस्था बढ़कर 40 प्रतिशत अडानी ,अम्बानी जैसे घरानों के पास अभी है,जो बढ़कर न जाने कहाँ पहुंच जाएगी. ऐसी स्थिति को रोकने के लिए एटक के सभी कार्यकर्ताओं को संगठित रूप से कार्य करने होंगे और संगठन को और अधिक बलशाली बनाने होंगे. तभी आर सी सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि मिल पायेगी. संगठन के राज्य के संयुक्त महासचिव लीना चक्रवर्ती ने कहा की आर से सिंह जमीनी स्तर से खदान के मजदूरों को जुड़े हुए थे. वह एक साथ पूरे सारे देश के लिए मिसाल बने हुए थे. आज देश एक कठिन परिस्थिति से गुजर रही है ,और इस समय कामरेड आर सी सिंह जैसे क़द्दावर नेता की जरूरत है, क्योंकि अभी केंद्र में एक फासिस्ट सरकार चल रही है और हमारे राज्य में एक नजदीकी फासिस्ट सरकार चल रही है. इस समय कोलकाता में जगह-जगह संगठित होकर लोग आंदोलन कर रहे हैं कर रहे हैं. ऐसे समय में हम सभी को संगठित होकर आवाज बुलंद करनी है. स्मरण सभा को सफल बनाने में संगठन के गोविंद राउत,अमर बाउरी सहित स्थानीय नेताओं की अहम भूमिका रही.












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