सिक्खों के 9 वें गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 348 वां शहादत दिवस पर पंच प्यारे की अगुवाई में की गई नगर परिक्रमा






 रानीगंज-भारत के गौरवपूर्ण इतिहास में कई ऐसे क्रांतिकारी पुरुषों का जन्म हुआ, जिन्होंने अपने धर्म, संस्कृति, आदर्शों एवं मूल्यों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहूति दे दी.इन महान पुरुषों में सिखों के 9 वें श्री गुरु तेग बहादुर सिंह का नाम भी एक है. गुरु तेग बहादुर को 'हिंद की चादर' भी कहा जाता है. इन्होंने अपने धर्म को बचाने के खातिर अपनी बलि दे दी .17 दिसंबर को श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 348 वां शहादत दिवस पर रानीगंज श्री गुरु सिंह सभा द्वारा गुरु पर्व शिशु बगान मैदान में गुरमत समागम का आयोजन हुआ .

इस मौके पर रानीगंज के विधायक तापस बनर्जी ,एसीपी सेंट्रल दो श्रीमंत बनर्जी ,रानीगंज बोरो चेयरमैन मुजम्मिल शहजादा सहित तमाम गणमान्य लोगों को सिरोपा पहना कर सम्मानित किया गया. सभी ने गुरु तेग बहादुर सिंह जी के शहीदी दिवस पर गुरु ग्रन्थ साहिब के समक्ष मत्था टेका और आशीर्वाद लिया. इस अवसर पर विधायक तापस बनर्जी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर सिंह जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया था. उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी , तत्कालीन शाशक द्वारा उनका सिर कलम कर दिया गया था ,लेकिन उन्होंने अपने धर्म की रक्षा करने का प्रण नहीं छोड़ा. विधायक ने कहा कि ऐसे ही महान व्यक्तियों की वजह से पूरे विश्व में सभी का धर्म सुरक्षित है. और हम सब एक दूसरे के साथ सौहार्दपूर्ण तरीके से निवास करते हैं.

रानीगंज गुरुद्वारा के अध्यक्ष बलजीत सिंह ने कहा कि दिल्ली के कीर्तनी जत्था भाई महेंद्रजीत सिंह खालसा एवं दिल्ली के धर्म प्रचारक डॉक्टर मनप्रीत सिंह मुख्य रूप से उपस्थित गुरु तेग बहादुर की जीवनी एवं उनकी शहादत की प्रस्तुति कीर्तन एवं प्रवचन के माध्यम से संगतो को सुनाया. डाक्टर मनप्रीत सिंह ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी को हिंद की चादर कहा जाता है . हिंदू धर्म की रक्षा हेतु अपने प्राण न्यौछावर किए थे. धर्म एवं मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बलिदान दी. उनकी शहादत हर वर्ष शहीदी दिवस के रूप में याद की जाती है विश्व के इतिहास में गुरु तेग बहादुर जी साहिब का स्थान अद्वितीय है .गुरु जी का संदेश था कि किसी भी इंसान को ना तो डराना चाहिए और ना ही डरना चाहिए.उन्होंने मानवाधिकारों के अंधविश्वासों की आलोचना कर समाज में नए आदर्श स्थापित किये. श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की वाणी मानव मन में जो तीन प्रमुख भाव पैदा करती है वह है वैराग्य ,भक्ति एवं सिमरन. इस गुरु पर्व पर स्वास्थ्य जांच शिविर एवं गुरु की लंगर की व्यवस्था की गई थी,जिसका लाभ हजारों की संख्या में लोगो ने उठाये. इस अवसर पर विभिन्न गुरुद्वारा कमिटी में से तेजिंदर सिंह बल अन्य पदाधिकारी ने अपने विचार प्रकट किए. मौके पर नगर कीर्तन एवं भव्य शोभायात्रा निकाला गया.मॉर्निंग वॉकर ग्रुप द्वारा नगर परिक्रमा में शामिल लोगों के लिए चाय ,पानी ,शर्बत की व्यवस्था की गई थी.

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