रांनीगंज- रानीगंज की पारंपरिक सार्वजनिक पूजाओं में से एक सोलह आना दुर्गा पूजा, जिसे प्रजापति दुर्गा के नाम से भी जाना जाता है, इस पूजा की खासियत है की पूजा के साथ साथ प्रतिमा विसर्जन .यहां की मुख्य आकर्षण होती है, प्रत्येक बार की तरह इस बार भी बुधवार की शाम से इस विसर्जन का प्रत्येक चौराहा मोड़ पर लोगो का हजूम उमड़ पड़ा. पूजा आयोजकों ने पुरानी प्रथा का पालन करते हुए लक्ष्मी पूजा के बाद बुधवार को पूजा के बिसर्जन चरण को फिर से पूरा किया ,हालांकि इस बार प्रशासन की और से निर्देश दिया गया था कि एकादशी के दिन ही सारी प्रतिमाओं का विसर्जन कर दिया जाया,मगर इस प्रतिमा विसर्जन की परंपरा का निर्वहन करते हुए इसे लखी पूजा के पश्चात बुधवार को विसर्जन किया गया. इस बार इस दुर्गा पूजा के 127वें वर्ष है .भीड़ का आकर्षक एवं दिलचस्प बनाने के लिए चाइनीज लाइटिंग, रामगढ़ के बैंड, बर्दवान के दोहर बैंड,क्लब बैंड , लेडीज डांस, दो जेंट्स क्लब बैंड , नाचन बैंड, कुरकुरी ढोल, हरिबोल ट्रूप के साथ विभिन्न वेशभूषा में तरह तरह की झांकी , हिंदी सिनेमा के मिशन रानीगंज, चंद्रयान 3 जैसे बहुआयामी मनोरंजक चरित्र तैयार किये गये . इसके साथ ही रंग-बिरंगी रोशनी,जिसमें तरह तरह के भूत,बेताल शामिल होना था. बुधवार की सुबह से ही क्लब के सभी सदस्य सब कुछ सुचारू रूप से पूरा करने के लक्ष्य में जुटे हुए थे,शहर के प्रत्येक रास्ते ,चौराहे पर हजारों की संख्या में महिला पुरुष इसके दर्शन में जुटे हुए थे.प्रशाशन की चुस्त व्यवस्था थी. घंटो पुरे शहर की परिक्रमा कर प्रतिमा विसर्जन तरबंग्ला के कुलु तालाब में की गयी.




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