रानीगंज-प्राचीन परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन करते हुए अपनी पूजा की प्रथा को जारी रखते हुए, सात डोलों को एक साथ ले जाकर, कोलाबऊ लाकर और नवपत्रिका स्नान करवा कर देवी दुर्गा की पूजा शुरू की गई.यह लगभग 500 वर्षों के पारंपरिक रीति-रिवाज हैं. शनिवार की सुबह से ही पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों समेत रानीगंज के सीयारसोल गांव में पुजा की धुम देखी गयी.महासप्तमी की सुबह ढाक- ढोल के साथ डोला यात्रा रानीगंज के पवित्र तालाब कहे जाने वाले पंडित पोखर तालाब पहुंची. दुर्गा पूजा का महासप्तमी उत्सव राजबाड़ी में हाजरा बुरी, चटर्जी बारी, बनर्जी बारी, मुखर्जी बारी, कांजीलाल बारी की पारिवारिक पूजा के साथ शुरू होता है, जो रानीगंज की सबसे पुरानी पूजाओं में से एक है. इस बार रानीगंज के सीयारसोल राजबाड़ी इलाके के पंडितपुकुर में करीब 12 डोला पहुंची, जिनमें से आठ डोला सीयारसोल ग्राम से आईं. इसके अलावा आसपास के विभिन्न हिस्सों से भी पुजा आयोजक पंडित पोखर पहुंचे. डोला यात्रा में उदय संघ, पंजाबी मोड़ एवं अन्य सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति ने भी भाग लिया और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मां दुर्गा की पूजा शुरू की. हालांकि रानीगंज में पंचमी के दिन से ही सभी पूजा समारोह शुरू हो गये हैं. कई क्लब संगठनों ने पहले से ही दुर्गा पूजा पर केंद्रित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया है.











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