रानीगंज-कुष्ठ कॉलोनी के असहाय लोगों का अफसोस है कि उनकी मदद के लिए कोई नहीं आता, इसलिए वे पूजा के दिनों में असहाय होकर दिन गुजारते हैं. साल के सबसे बड़े त्योहार दुर्गा पूजा के दौरान गुजरात के सूरत से साड़ियां मंगाई गईं और उन्हें रंग-बिरंगी नई साड़ियां सौंपी गईं. लायंस क्लब रानीगंज की महिला शाखा गरिमा नामक ने इस पूज में असहाय गरीबों तक की पूजा में खुशियां पहुंचाने के लिए विशेष पहल की है. इस संगठन की महिलाओं का कहना है कि त्योहार के दिनों में जब हर कोई खुश होता है, तब गरीब और अभाव ग्रस्त इलाकों की महिलाएं असहाय होती हैं, इसी बात को ध्यान में रखते हुए वह लोग कई सालों से इस अवसर पर सभी के चेहरे पर खुशी लाने के मकसद से यह कार्य कर रही हैं. दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार है . इस मौके पर 50 असहाय परिवारों की महिलाओं को नई साड़ियां और खाने के पैकेट बांटकर उन्हें थोड़ी सी खुशी देने की पहल की गई. जे.के. नगर के लाइन पार कुष्ठ कॉलोनी की 50 महिलाओं को नई साड़ियाँ दीं गयी .इस अवसर पर लायंस क्लब ऑफ रानीगंज के लायंस दिलीप कुमार सिंह, मंजीत सिंह, राजेश जिंदल, सुनील गनेरीवाला, सज्जन टिबरेवाल, गरिमा संस्था के इस प्रोजेक्ट की अध्यक्ष सरिता जिंदल, मुख्य दानदाता अनिता खेरिया, संस्था की चेयरपर्सन प्रीति खेतान की उपस्थिति में , संगठन की महिला विंग की सचिव प्रीति शराफ,वर्षा लोएल्का के नेतृत्व में महिलाओं ने इस विशेष सहायता कार्यक्रम में पहुंचकर कुष्ठ कॉलोनी के लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला दी . इससे पहले गरिमा की ओर से रानीगंज के सुदूर आदिवासी गांव तिराट इलाके और बांकुरा जिले के सुदूर आदिवासी गांव पावडा में क्रमश: 500 और 350 महिलाओं को नई साड़ियां दी गईं. लायंस क्लब का रानीगंज के सचिव वर्षा लॉयलका ने बताया के गरिमा की तरफ से हर साल दुर्गा पूजा के अवसर पर वस्त्र वितरण का कार्यक्रम किया जाता है. इस साल जेके नगर के कुष्ठ कॉलोनी में यह कार्यक्रम किया गया क्योंकि अमूमन यहां पर कोई आता नहीं है .इस वजह से यहां की महिलाएं वंचित रह जाती हैं. इन्हीं महिलाओं के चेहरे पर दुर्गा पूजा के समय खुशी लाने के लिए उनकी तरफ से यह अभियान चलाया गया.











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