रानीगंज-महान उपन्यासकार कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंत त्रिवेणी देवी भलोटिया कॉलेज में हिंदी विभाग की ओर से जयंती मनाई गई.इस अवसर पर टीचर्स इंचार्ज जोयेश राजगुरु ने प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. मुख्य अतिथि के रूप में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पधारे डॉ.
महेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने भी कथा सम्राट प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इस अवसर पर हिंदी विभाग के पीजी काॅडिनेटर डॉ. जयराम कुमार पासवान, यूजी कॉर्डिनेटर डॉ वसीम आलम, डॉ मंजुला शर्मा, डॉ मीना कुमारी, डॉ किरण लता दुबे तथा रीना तिवारी साथ ही उर्दू विभाग एवं राजनीति विभाग के सहायक प्राध्यापकों ने भी प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए अपना श्रद्धा सुमन अर्पित किया.
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में एक छोटा सा व्याख्यान माला रखा गया था, जिसमें मुख्य वक्ता के तौर पर आये मुख्य अतिथि ने प्रेमचंद पर अपना बहुमूल्य वक्तव्य रखे तथा हिंदी व अन्य विभाग के सहायक प्राध्यापकों ने भी अपने विचारों को रखा.
टीचर्स इंचार्ज जोयेश राजगुरु ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य तत्कालीन भारत की दशा को व्यक्त करता है. प्रेमचंद के साहित्य में स्त्रियों के शोषण पीड़ितों की समस्या को देखा जा सकता है.
उर्दू विभाग की वरिष्ठ अध्यापिका डॉ. साबेरा हिना खातून ने प्रेमचंद की कहानियों पर अपने सार्थक विचार रखते हुए कहा कि प्रेमचंद जी ने 300 से अधिक कहानियां लिखी हैं जिसमें से 132 के आसपास सिर्फ़ उर्दू में लिखी गई हैं . यानी प्रेमचंद का हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं पर जबरदस्त अधिकार था.
हिंदी विभाग की प्राध्यापिका डॉ मंजुला शर्मा ने
कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य में राष्ट्रवादी विचारों को व्यक्त किया है . प्रेमचंद के विभिन्न कहानियों, उपन्यासों की चर्चा करते हुए उनकी प्रासंगिकता को हमारे सामने रखा
उर्दू विभाग के यूजी कॉर्डिनेटर डॉ शमशेर आलम ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं जो है वह आसमान की बुलंदियों को छूता है और जमीन से हम लोगों को जोड़ता है.
उर्दू विभाग के अध्यापक डाॅ. इरशाद अंसारी ने कहा कि मैं 18 साल की उम्र से प्रेमचंद को पढ़ रहा हूं और 5 साल से मैं उर्दू विभाग में पढ़ा रहा हूं और हर बार जब उनकी कहानियों को पढ़ता हूं तो कोई ना कोई नया मसला उनकी कहानियों में हमें दिखाई पड़ता है जो हमें काफी प्रभावित करता है.
हिंदी विभाग की प्राध्यापिका डॉ मीना कुमारी ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य सच्चाई के धरातल से जुड़ी है . प्रेमचंद के हृदय में गरीबों, पीड़ितों के लिए अथाह प्रेम था. प्रेमचंद ने साहित्य में यथार्थवादी परंपरा की नींव रखी.
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से पधारे डॉ महेंद्र प्रसाद कुशवाहा जो इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे, उन्होंने प्रेमचंद के प्रति अपने विचारों को व्यक्त करते हुए कहा कि प्रेमचंद ने दलितों के मुद्दों पर खुलकर लिखा तथा समाज में शोषक वर्ग के शोषण के खिलाफ अधिक लिखा, उनकी रचनाओं में शोषित वर्ग का जीता जागता तस्वीर नजर आता है. प्रेमचंद जन लेखक हैं. 1936 में प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना के अवसर पर उन्होंने कहा था कि साहित्य का काम केवल मनोरंजन करना नहीं होता है बल्कि साहित्य जीवन की आलोचना करता है जीवन की खूबसूरती को बयां करता है. जीवन की विडंबना को उजागर करता है. उनकी रचना मनोरंजन की नहीं है। प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं में श्रम का जो महत्व दर्शाया है, वह यथार्थपरक जान पड़ता है.
इस कार्यक्रम का संचालन पीजी कॉर्डिनेटर डॉ . जयराम कुमार पासवान ने किया। उन्होंने प्रेमचंद की समसामयिकता पर अपनी ज्ञानवर्धक बातें छात्र- छात्राओं के सामने रखी.
धन्यवाद ज्ञापन यूजी कॉर्डिनेटर डॉ वसीम आलम ने दिया उन्होंने उपस्थित सभी सहायक प्राध्यापकों, प्राध्यापिकाओं और मुख्य अतिथि को धन्यवाद देते हुए अपनी बात समाप्त की
इस कार्यक्रम में हिंदी और उर्दू विभाग के छात्र एवं छात्राएं तथा छात्र प्रतिनिधि श्याम पूरी भी उपस्थित थे.


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