जेके नगर : सातग्राम-श्रीपुर क्षेत्र के बोगड़ा स्थित ईशीएल के गेस्ट हाउस के सभागार में शुक्रवार को असमयिक मृत्यु और आत्महत्या मृत्यु के मामलों को लेकर एक सेमिनार आयोजित किया गया। इस सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में मो. इरफ़ान अहमद अंसारी, डीएमएस (माइंस), क्षेत्र-I एवं राजा मौली, डीडीएमएस (माइंस), क्षेत्र-I शामिल हुए। जिन्हें सातग्राम-श्रीपुर एरिया केे महाप्रबंधक उपेन्द्र सिंह ने पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। सभा की अध्यक्षता मो. इरफ़ान अहमद अंसारी ने किया।
सभा के अध्यक्ष की अनुमति से सदस्यों ने सातग्राम-श्रीपुर क्षेत्र की खदानों के मामले में प्राकृतिक मृत्यु और आत्महत्या मृत्यु के मामलों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में एनके साहा महाप्रबंधक ईसीएल (सुरक्षा), डॉ फैयाज अहमद एमओ निमचा कोलियरी, डॉ पीके बर्णवाल, एमओ भनोड़ा कोलियरी, डॉ शुभांकर मुखर्जी एमओ श्रीपुर, डॉ एसएस गुप्ता एमओ कालिदासपुर प्रोजेक्ट, डॉ वीके पासवान एएमओ सातग्राम-श्रीपुर एरिया, डॉ सुदेशना मंडल एमओ सातग्राम श्रीपुर एरिया डिस्पेंसरी, संजय भौमिक एपीएम सातग्राम-श्रीपुर एरिया, आरपी पांडे एजेंट भनोड़ा-गिरमिट ग्रुप ऑफ माइंस, राहुल सरकार एजीएम सातग्राम-श्रीपुर एरिया, इरफान अहमद अंसारी डीएमएस माइंस ने अपने विचार प्रकट किए।
इस विषय में सातग्राम श्रीपुर एरिया के महाप्रबंधक उपेंद्र सिंह ने बताया कि सेमिनार का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक मौत एवं आत्महत्या को रोकने के लिए सही तरह से खदान एक्ट के तहत नियमों का पालन करना, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं कल्याण प्रावधान का पालन करना, श्रमिकों का लगातार स्वास्थ्य का निरीक्षण करना, वेलफेयर ऑफिसर को श्रमिकों का काउंसलिंग करके उनके परेशानियों को जड़ से समाप्त करना, माइंस में हवा और पानी की व्यवस्था करना, खदान में कार्यरत कर्मचारियों पर मानसिक दबाव नहीं डालना, खदान में कार्यरत कोई भी श्रमिक शराब के नशे में ड्यूटी ना आए यह सुनिश्चित करना था।
सेमिनार में एनके साहा ने बताया कि पिछले 5 वर्षों के दौरान प्राकृतिक और आत्मघाती मौतों के 33 मामले सामने आए हैं। जिनमें से लगभग 29-30 प्राकृतिक मौतें हैं और लगभग 3-4 आत्महत्या के मामले हैं। प्राकृतिक एवं आत्मघाती मौतों के आँकड़े 2023 में 3, 2022 में 12, 2021 में 6 मामले हुए। 70-80% मामले सतह पर हुए हैं जबकि 20-30% यू/जी में ज्यादातर मामलों में इसका कारण हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज रहा है। यह चिंता का विषय है और हमें इनसे कैसे बचा जाए इस पर विचार करना चाहिए। आत्महत्या से मौतें तब होती हैं जब कर्मचारी पारिवारिक/पेशेवर समस्याओं के कारण सोच के चरम पर होता है/उम्मीद खो देता है।
इस दौरान उपस्थित डॉक्टरों ने माइंस में काम करने के दौरान प्राकृतिक मृत्यु एवं आत्महत्या करने वाले श्रमिकों पर चर्चा की इस दौरान डॉक्टरों ने बताया कि जिन कर्मचारियों को कोई भी बीमारी हो उन्हें सही समय पर दवा लेना चाहिए समय-समय पर डॉक्टरों का परामर्श लेना चाहिए, उम्र के आधार पर श्रमिकों का खदान या सतह पर काम देना चाहिए, विशेषकर मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप वाले रोगियों को गंभीरता से अपनी देखभाल करना चाहिए तथा समय-समय पर डॉक्टरों से जांच करानी चाहिए। इन सब विषयों पर ईसीएल प्रबंधन को विशेष ध्यान रखने की सलाह डॉक्टरों ने दी।
बैठक सभा अध्यक्ष के धन्यवाद ज्ञापन के साथ समाप्त हुई।




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