सालानपुर-ओडिशा के बालासोर में बीते शुक्रवार दो जून की शाम हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे में सैकड़ों लोगों की जान चली गई वहीं हजारो लोग घायल हैं। घायलों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है. पीड़ितों के दुख को कम करने के लिए केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय सहित तमाम राज्य सरकारों ने मुआवजे का ऐलान भी कर दिया है। वहीं इस हादसे में भाग्यशाली रहे लोगों को अब सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाने का काम जारी है. इसी कड़ी में सालानपुर प्रखंड के रूपनारायणपुर निवाशी ऋतिशंकर रॉय एंव चित्तरंजन निवाशी मुनेश कुमार, राकेश कुमार रंजन और संजय पाल को बालासोर से हावड़ा एंव हावड़ा से ट्रेन द्वरा चित्तरंजन लाया गयाl बता दे ये चारों लोग एक साथ इलाज के लिए बीते 27 मई को बेंगलुरू गये थे। जहाँ से वापसी के समय बीते एक जून को सभी लोग यशवंतपुर-हावड़ा सुपरफास्ट ट्रेन से वापस हावड़ा लौट रहे थे। इस दौरान ट्रेन हावड़ा पहुचने से पहले ही भयावह ट्रेन हादसे का शिकार हो गई। वही भयावह ट्रेन हादसे में भाग्यशाली रूप से बचे रूपनारायणपुर निवाशी ऋतिशंकर रॉय को बुधवार बराबानी विधायक प्रतिनिधि ने पुष्पगुच्छ एंव मिठाई दे कर शकुशाल वापसी के लिए उनके घर जा कर सुभकामनाएँ दी। मौके पर जिला परिषद कर्माध्यक्ष मोहम्मद अरमान, प्रखंड पंचायत समिति अध्यक्ष फाल्गुनी कर्मकार घासी, उपाध्यक्ष बिधुत मिश्रा एंव अन्य मौजूद रहे। इस दौरान ऋतिशंकर रॉय ने सभी से ट्रेन हादसे की घटना की तस्वीरों को लब्जों में बयां करते-करते रोने लगे। उन्होंने ने मौत के उस मंजर की दस्ता को सुनाते हुये कहा की मौत को इतना करीब से देखा कर और अपने घर जिंदा लौटकर भी उन्हें हर पल वह मौत की तस्वीरे सामने आ जाती है। उन्होंने ने कहा कि मुझे अब भी विश्वास नहीं हो रहा है ट्रेन हादसे में सकुशल घर जीवित पहुँच गया। भगवान एंव परिजनों की दुआ ने मुझे फिर से एक नया जीवन दिया है। 27 मई को वे इलाज के लिए बेंगलुरु गए थे । इलाज के बाद चारो लोग दो जून को यशवंतपुर-हावड़ा सुपरफास्ट में सवार हुए। ट्रेन पहले ही कुछ घंटों की लेट से चल रही थी। हमारी योजना थी कि हावड़ा पहुँच कर वहा से हिमगिरि ट्रेन पकड़ कर चित्तरंजन पहुँचने की। इसे पहले ही ट्रेन शाम करीब सात बजे ओडिशा के बालेश्वर से पहले बहनागा स्टेशन के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हमलोग ए-1 एसी बोगी में बैठे थे हमारे कोच के पीछे दो सामान्य कोच, एक विकलांग एंव एक गार्ड केबिन था। घटना के बाद से ये चार कोच टूट कर बिखर गये। कुछ ही सेंकेंड में पूरा मंजर भय एंव बचाओ-बचाओ आवाजो से गूंज गया। हमारी ट्रेन घटना स्थल से कुछ दूर जा रुकी हाँलाकि कुछ सेंकेड के फसलों की वजह से हमारा कोच कोरोमंडलएक्सप्रेस के डिब्बों से टकराने से बच गया। हमलोग ने देखा कि घटना के बाद हमारे पीछे का जनरल कोच का टूटा हुआ कुछ हिस्सा रगड़ा खाता हुआ ट्रेन के साथ चल रहा था। घटना में ऐसा कंपन एंव एकाएक हुये घटना ने सब को भयपूर्ण कर दिया था। चारो तरफ अंधेरा एंव चिल्लाने की आवाजें सुनाई दे रही थी। उन्होंने ने कहा कि ट्रेन के डिब्बों में कहीं पंखे से लाशें लटक रही थीं तो कहीं दरवाजे से यात्रियों के बचने की चीखें सुनाई दे रही थी। उन्होंने ने बताया कि घटना के बाद से रात तीन बजे तक सभी यात्रियों ने रेलवे लाइन के किनारे पेड़ों के नीचे रात गुजारी। इस दौरान ट्रेन के टीटीई, रेस्क्यू टीम एंव स्थानीय लोगो ने बहुत अधिक सहायता की। सूखा खाना, दवा देकर उनका सभी यात्रियों का मनोबल बनाए रखा । स्थानीय लोगों ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और उन्हे सकुशल घर पहुंचाने का आश्वासन दिया। अंत में वे 3 जून की दोपहर को हावड़ा पहुंचे और फिर वहाँ से रूपनारायणपुर स्थित अपने घर पहुँचे एंव उनके साथी चितरंजन स्थित अपने रेलवे क्वार्टर पहुँचे । ऋतिशंकर ने कहा कि ऐसे हादसे की निष्पक्षता से जाँच हो एंव दोषियों के खिलाफ करवाई हो।
वही ऋतिशंकर रॉय की पत्नी घटना के बाद से चिंतित थी, अपने पति को घर सकुशल वापसी के बाद भगवान से प्रथना कर रही है। उन्होंने ने कहा कि भगवान की कृपा से ही आज उनके पति घर लौटे है। हमलोगों ने न्यूज में देखा कि ट्रेन भीषण रूप से दुर्घनाग्रस्त हो गया है। जिसके बाद से वे लोग बहुत चिन्तित थे।


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