पश्चिम बंगाल सिविल सर्विसेज की नियुक्ति की परीक्षा में हिंदी उर्दू और संथाली भाषा को हटाए जाने के विरोध में संथाली उर्दू हिंदी बचाओ समिति का गठन


आसनसोल- वेस्ट बंगाल सिविल सर्विसेज (एक्सक्यूटिव) की नियुक्ति की परीक्षा में हिंदी, ऊर्दू और संथाली भाषा को हटाये जाने के विरोध में रविवार को आसनसोल स्तिथ एक होटल में इन तीन भाषाओं से जुड़े समाज के विभिन्न तबकों के प्रतिनिधियों की बैठक हुई. बैठक में प्रदीप सुमन, निर्मल झा, आसनसोल चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव शंभू नाथ झा, पार्षद गुलाम सरवर, शिक्षक सफी खान, अधिवक्ता विनोद कुमार यादव,अधिवक्ता हरिहर प्रसाद यादव, बंटी सिंह, छात्र आलोक वर्मा, सोमनाथ तिवारी, अभिषेक कुमार सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता सोनू यादव, आदिवासी शिक्षक संजय हेम्ब्रम, आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता सुशील टुडू, शानतनु हेम्ब्रम, अंकित सिंह आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे.

बैठक के दौरान संथाली, ऊर्दू, हिंदी बचाओ समिति का गठन किया गया. इसके लिए 13 सदस्यीय कोर कमेटी का गठन किया.जिसमे संथाली भाषा से संजय हेम्ब्रम, सुशील टुडू, ऊर्दू भाषा से गुलाम सरवर, मोहम्मद शमी खान, हिंदी भाषा से निर्मल झा, अधिवक्ता विनोद कुमार यादव, अभिषेक कुमार सिंह, बंटी सिंह, सोमनाथ तिवारी, सोनू यादव, आलोक वर्मा, अधिवक्ता हरिहर प्रसाद यादव तथा प्रदीप सुमन शामिल किये गये.


बैठक में निर्मल झा ने कहा की इन भाषाओं के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करनेवाले युवक-युवतियों के लिए इन परीक्षाओं में शामिल होने का रास्ता बंद हो गया है. इसके साथ ही उन बांग्लाभाषियों का भी रास्ता बंद हो गया है, जो माध्यमिक परीक्षा में अंग्रेजी तथा हिंदी को लेकर केंद्रीय शिक्षा बोर्ड से पढ़ाई कर रहे हैं. राज्य सरकार के इस निर्णय से इन भाषाओं से जुड़े लाखों युवक-युवतियों का भविष्य अंधकारमय हो गया है. राज्य सरकार के इस निर्णय के खिलाफ इन भाषा से जुड़े लोगों में भारी आक्रोश है. इसके खिलाफ हमे एकजुट हो कर यह लड़ाई लड़नी होगी. बैठक के दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस अधिसूचना को वापस लेने के लिए या इन भाषाओं के युवक-युवतियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए अभियान चलाया जायेगा. अभियान को विस्तार देने के लिए कोर कमेटी की बैठक शीघ्र बुलाने पर सहमति हुई.

सबने समवेत स्वर में कहा कि राज्य सरकार के इस निर्णय से समाज का बड़ा तबका प्रभावित हुआ है, तथा बिना किसी तैयारी के राज्य सरकार ने इसे लागू कर दिया है. 

उनका कहना था कि राज्य सरकार को इस निर्णय को लागू करने से पहले होमवर्क करना चाहिए था. कम से कम 5 वर्षो तक सभी भाषा माध्यम के स्कूलों में बांग्ला भाषा विषय की पढ़ाई माध्यमिक तक अनिवार्य करनी चाहिए थी, इसके बाद ही इस निर्णय को लागू करना चाहिए था. उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार के पास इतना समय नहीं था तो वह पासआउट युवक-युवतियों के लिए सर्टिफिकेट कोर्स की पढ़ाई की व्यवस्था कर दें, तथा इसके आधार पर प्रवेश परीक्षा में बांग्ला विषय पेपर की परीक्षा लेनी चाहिए. बैठक में निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार तक अपनी अपील पहुंचाई जाये. इसके साथ ही तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव सह सांसद अभिषेक बनर्जी को इस संबंध में पश्चिम बर्दवान जिले के दौरे के समय ज्ञापन देने का निर्णय लिया गया.साथ ही हिंदी,उर्दू तथा संथाली भाषा के जन प्रतिनिधियों से भेंट कर अपनी मांगों को अवगत कराने पर निर्णय लिया गया.

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