बर्नपुर : बर्नपुर स्थित आईएसपी कारखाने में सोमवार की रात तबीयत बिगड़ने से कारखाने के अंदर ओएचएस में चिकित्सा के दौरान एक ठेका श्रमिक की मौत हो गई। रात में ही ठेका श्रमिक के शव को आईएसपी के बर्नपुर अस्पताल में लाया गया।मृतक श्रमिक का नाम सुजॉय शील था। इस दौरान इंटक यूनियन प्रतिनिधियों ने मुआवजे की मांग पर अस्पताल परिसर में शव के साथ प्रदर्शन किया। यूनियन प्रतिनिधियों का आरोप है कि सुजॉय शील की तबीयत गैस लगने के कारण बिगड़ी जिसके कारण उसकी मौत हो गई। इसलिए कार्य के दौरान श्रमिकों की मौत को लेकर जो मुआवजा राशि और उनके आश्रितों को नौकरी दी जाती है। वह दी जाए। जबकि प्रबंधन का कहना है कि सुजॉय शील 26 मीटर ऊपर बीओएफ विभाग में कनवर्टर पर कार्य कर रहे थे। इस दौरान उसने अपने को असहज महसूस किए। उसके बाद यह ओएचएस में गए। जहां चिकित्सा के दौरान उनकी मौत हो गई।यह एक्सीडेंट नहीं इंसीडेंट है। बाद में प्रबंधन इस बात पर राजी हुआ कि सुजॉय शील के पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद उनके आश्रितों को मुआवजा दी जाएगी।इसकी विस्तृत जानकारी देते हुए इंटक के महासचिव हरजीत सिंह ने बताया कि सुजॉय शील सोमवार की सी शिफ्ट में कार्य करने के लिए गया था। वह टेस्ट मेटल इंजीनियरिंग कंपनी का ठेका श्रमिक था। 11:30 बजे के लगभग वह अपने आप को असहज महसूस किया।वह अपने दोस्तों के पास गया। वे लोग उस समय खाना खा रहे थे। उसने कहा कि उसे अच्छा महसूस नहीं हो रहा है। उसके बाद उसके साथी श्रमिकों ने उसे ओएचएस में ले गए। जहां उसे ऑक्सीजन चढ़ाई गई। लेकिन चिकित्सा के दौरान ही उसकी मौत हो गई। क्योंकि उसे गैस लग गई थी। मृत श्रमिक के आश्रितों को नौकरी देने की मांग पर प्रदर्शन किया गया। इसके बाद प्रबंधन और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच एक सहमति पत्र बना।जिसमें प्रबंधन ने लिखित आश्वासन दिया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद सुजॉय शील के आश्रित को नियमानुसार मुआवजा और नियोजन दिया जाएगा। गौरतलब है कि सेल के डीएसपी में भी 1 सप्ताह के दौरान तीन अलग-अलग घटनाओं में 5 श्रमिकों की मौत हो गई है। श्रमिकों के सुरक्षा को लेकर वहां भी यूनियन प्रबंधन को घेरे में ले रहे हैं।









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