आसनसोल : फ्रेट कॉरीडोर के लिए अतिक्रमण मुक्त करने गया बुधवार को रेलवे का बुलडोजर को बैरंग वापस लौटना पड़ा। क्योंकि रेलपार ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के द्वारा पुनर्वास और उचित मुआवजा की मांग पर कई दिनों से धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। जैसे ही बुलडोजर रेलपार डीपूपाड़ा स्थित अतिक्रमण मुक्त करने के लिए पहुंचा। वैसे ही आंदोलनकारी बुलडोजर के नीचे सो गए और रोड जाम कर प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शन की सूचना पाकर आसनसोल नगर निगम के चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी, वार्ड पार्षद दीपा हलदर भी घटनास्थल पर पहुंच गये और आंदोलनकारियों के साथ बुलडोजर के सामने बैठ गए। प्रदर्शनकारियों के उग्र रूप देखकर रेलवे अधिकारी पीछे हट गए और उन्हें बुलडोजर लेकर वापस आना पड़ा।इस संबंध में चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी ने कहा कि रेलवे व्यवसायियों को बिना पुनर्वास और मुआवजा दिए बिना बुलडोजर चलाने का रेलवे जो मनमानी कर रहा है। उसे स्थानीय जनता बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि रेलवे को यहां कॉरीडोर बनाने के लिए कई पेड़ को काटना पड़ेगा। जिससे परिवेश खराब होगा। पेड़ काटने के लिए रेलवे को अनुमति लेना पड़ेगा। जिसकी अनुमति रेलवे ने नहीं ली है। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार के अधिकारियों ने क्या एग्रीमेंट किया है। वही जानते हैं। किसी जनप्रतिनिधि को यह जानकारी नहीं है। जनता के सुख सुविधा के लिए जनप्रतिनिधि चुने जाते हैं। जनता के लिए ही प्रशासन है। इसलिए रेलवे को नगरनिगम, मंत्री मलय घटक जिला शासक के साथ बैठकर बातचीत करनी होगी। व्यवसायी एवं स्थानीय लोगों का पुनर्वास करना पड़ेगा। यदि रेलवे ऐसा नहीं करेगा तो लोग प्रदर्शन करेंगे ही। रेलवे पहले अपने जमीन में काम क्यों नहीं शुरू कर रहा है। वही रेलपार ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव आशीष कृष्ण चटर्जी ने कहा कि रेलवे जब तक व्यवसायियों और स्थानीय लोगों के पुनर्वास और उचित मुआवजा नहीं देगा।तब तक उन लोगों का प्रदर्शन चलता रहेगा।गौरतलब है कि पूर्व मेयर सह भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कहा था कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार पहले ही बात कर चुकी है। उस समय स्थानीय प्रशासन जब नक्शा बना रहा था। तब अवश्य सभी से सहमति ली गई है।तभी जिलाधिकारी जमीन अधिग्रहण किए हैं लेकिन टीएमसी के नेता लोग को भ्रमित कर रहे हैं।









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