आसनसोल : पश्चिम बर्दवान जिला सीपीआई एटक एवं सीएमयू के महासचिव पूर्व राज्यसभा सांसद रामचंद्र सिंह का शनिवार की सुबह दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गई। उन्हें रविवार को आसनसोल स्थित उनके निवास स्थल सेन रेलवे रोड स्थित कुमारपुर लाया जाएगा। उनका शव श्रमिकों के दर्शन हेतु एटक कार्यालय में रखा जाएगा। वे पिछले 2 महीने से बीमार चल रहे थे।वे किडनी रोग से ग्रसित थे। उनकी डायलिसिस हो रही थी। जिसके कारण उन्हें 24 अक्टूबर को दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती हुए थे। वे अपने पीछे अपनी पत्नी ,पुत्र एवं पुत्रवधु को छोड़ कर गए . उनके निधन से पूरे आसनसोल शिल्पांचल और कोयलांचल में शोक की लहर है।उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए आसनसोल नगर निगम के चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी ने कहा कि आरसी सिंह के निधन से आसनसोल शिल्पांचल एक अपूरणीय क्षति हुई है। क्योंकि आरसी सिंह की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे सभी को साथ लेकर चलने में कुशल नेता थे।उन्होंने सांसद के रूप में भी बेहतर कार्य किया। अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ के कार्यकारी अध्यक्ष ईसीएल कॉर्पोरेट जेसीसी के सदस्य जयनाथ चौबे ने कहा कि आरसी सिंह के निधन से कोयला श्रमिकों के आंदोलन का एक स्तंभ गिर गया।वह बहु प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे। हिंदी भाषी नेताओं में उनकी एक अलग पहचान थी। उनमें सभी दलों को साथ लेकर चलने की अद्भुत कौशल कला थी। यही कारण था कि वह वामपंथी विचारधारा के होते हुए भी बीएन तिवारी के निधन के बाद उन्हें जैक का पर्यवेक्षक बनाया गया था। उनके निधन से कोयला श्रमिकों के आंदोलन को एक गहरी धक्का पहुंचा है। यह पूरे कोयलांचल के श्रमिकों के लिए अपूरणीय क्षति है।गौरतलब है कि आरसी सिंह मूलतः उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के निवासी थे। वह 1972 से पहले सिधूली कोलियरी में माइनिंग सरदार के रूप में नौकरी ज्वाइन की। उस समय राज्य और पूरे देश में कांग्रेस का बोलबाला था। इसके बावजूद भी उन्होंने एटक का दामन थामा और श्रमिकों के हक के लिए हमेशा संघर्ष करते रहे। 1972 में जब कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण हुआ। उसके बाद वे प्रोडक्शन कम सेफ्टी असिस्टेंट के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2006 में वह ईसीएल से सेवानिवृत्त हुए। वह सतत श्रमिकों के आंदोलन के लिए संघर्षरत रहे।इसके लिए उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। धीरे-धीरे वे एटक और सीपीआई में अपना पहचान बनाते चले गए। जिसके परिणाम स्वरूप वे पश्चिम बर्दवान जिला के सीपीआई और एआईटीयूसी के महासचिव बनाए गए। उनकी सांगठनिक क्षमता को देखते हुए वर्ष 2008 में सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव एबी वर्धन ने उन्हें राज्यसभा सदस्य के रूप में मनोनीत करने के लिए घोषणा की। वर्ष 2009 से 2013 तक राज्यसभा के सांसद रहे।अपने सांसद कार्यकाल में उन्होंने कोयला श्रमिकों के हितों के लिए संसद में प्रखरता के साथ अपनी बातें रखी।वर्तमान में राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता 11 के लिए गठन हुई जेबीसीसीआई के सदस्य भी थे।वे ईसीएल के जेसीसी कारपोरेट के सदस्य भी थे। उनके निधन पर विभिन्न श्रम संगठन के नेताओं ने अपना शोक व्यक्त किया है उनके निधन से पूरे कोयलांचल में शोक की लहर छा गयी है.












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