रांनीगंज-सोमवार को रानीगंज के लायंस क्लब के सभागार में रूरल मेडिकल प्रैक्टिशनर एसोसिएशन के तरफ से छठा वार्षिक साधारण सभा का आयोजन किया गया. इस मौके पर आसनसोल के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित थे. इनके अलावा 34 नंबर वार्ड के टीएमसी पार्षद सह रांनीगंज ब्लॉक टीएमसी अध्यक्ष रूपेश यादव, टीएमसी नेता सदन कुमार सिंह,न्यूरो फिजीशियन प्रवीण यादव, ऑर्थोपेडिक डॉक्टर दिनेश अग्रवाल ,गोपाल अग्रवाल, स्त्री रोग विशेषज्ञ पंकज कालोटिया, रेडियोलॉजिस्ट नितिन पीएम, डॉक्टर मनोज कुमार ,विकास रावत, हर्षवर्धन खैतान रूरल मेडिकल प्रैक्टिशनर के जिला अध्यक्ष अजीत मिश्रा जिला सचिव शंभू यादव ,रानीगंज शाखा के सचिव विकास रावत, राज्य सदस्य शांतनु बरई सहित पश्चिम बर्दवान जिला के लगभग 320 से रूरल मेडिकल प्रैक्टिशनर उपस्थित थे. इसके साथ ही कोलकाता तथा बिहार,झारखंड से आए कुछ चिकित्सकों ने भी कार्यक्रम में शिरकत की. इस मौके पर संगठन को कैसे और मजबूत किया जाए और आरएमपीए को किस तरह से कानूनी और सरकारी स्वीकृति मिले इस विषय पर चर्चा हुई. संगठन की तरफ से करीब 320 चिकित्सकों ने एक सम्मिलित मांग पत्र शत्रुघ्न सिन्हा को सौंपा और उनसे गुहार लगाई कि संसद में इस विषय को उठाएं ताकि केंद्र सरकार रूरल मेडिकल प्रैक्टिशनर को कानूनी वैधता प्रदान करें ,और सरकार की तरफ से उनको प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वह और बेहतर ढंग से मरीजों का इलाज कर सकें. इस विषय पर बोलते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि आज उन्होंने इस कार्यक्रम में शिरकत की और चिकित्सकों ने उन्हें कुछ पत्र सौंपा है जिसमें उनके कुछ मांगे हैं वह इन मांगों को संसद में उठाएंगे और कोशिश करेंगे कि इनकी यह मांगे पूरी हो. उन्होंने रूरल मेडिकल प्रैक्टिशनर की तारीफ करते हुए कहा कि कोरोना काल में इन चिकित्सकों ने जिस खूबी के साथ लोगों की सेवा की थी वह सराहनीय है,दूसरे कुछ बड़े डॉक्टर कोरोना के विषय में जानकारी न होने के बावजूद जिस प्रकार रोगियो को लूटा ,रोगियो पर एक्सपेरिमेंट किया है,उसकी जानकारी मुझे भी है,पर ऐसे समय में इन्ही सब ग्रामीण चिकित्सको ने जान की परवाह न करते हुए लोगो की जान बचाई, ऐसे में उनकी जायज मांगों को सरकार को पूरा अवश्य करना चाहिए.मैं इनकी कद्र करता हूँ,क्योंकि ग्राम ही शहर की जननी है ,जो भी लोग आज शहर में है,वह अथवा उनके पूर्वज ग्राम से अवशय जुड़े हुए हैं. चिकित्सक विकास रावत ने कहा कि यह उनके संगठन की तरफ से छठा वार्षिक साधारण सभा था, जिसमें उनके कई समस्याओं पर मंथन किया गया. कुल 320 चिकित्सकों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया .उन्होंने सरकार से मांग की के उनको भी सरकारी प्रशिक्षण दिया जाए और उनको सरकारी स्वीकृति प्रदान की जाए ताकि वह और बेहतर ढंग से मरीजों की सेवा कर सके.



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