रानीगंज-शोषणमुक्त समाज बनाने का सपना लिए तरुण सुकुमार बनर्जी सहित और कई स्वतंत्रता संग्रामी शहीद होकर अपनी जान गंवाई थी. ब्रिटिश काल में भारतीयों पर शोषण दमन अत्याचार चरम सीमा पर पहुंच गया था, और उन्हीं अत्याचारों के कारण हमारे देश में विभाजन और शोषण काफी हद तक बढ़ गया है, और इस व्यवस्था को बदलने का संघर्ष जारी रहना चाहिए, और उसी उद्देश्य से लाल झंडा लड़ रहा हैं .यह बातें डीवाईएफआई के प्रदेश सचिव मीनाक्षी मुखर्जी ने रानीगंज के बल्लभपुर स्तिथ बंगाल पेपर मिल के शहीद सुकुमार बनर्जी के स्मृति सभा के दौरान कही. मंगलवार को बल्लभपुर में सीआईटीयू का झंडातोलन कर शहीद सुकुमार बैनर्जी की मूर्ति पर माल्यार्पण उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई.पेपर मिल के श्रमिक संलग्न अंचल के कृषक छात्र युवा महिलाओं का दल भी मौके पर पहुंचा. कार्यक्रम के दौरान अन्य नेताओं की भांति श्रमिक नेता गौरंगो चटर्जी ने भी अपने वक्तव्य रखें, सीआईटीयू पश्चिम बर्दवान के जिला सचिव वंशगोपाल चौधरी, श्रमिक नेता रुनु दत्ता, सुप्रिया रॉय मनोज दत्ता प्रमुख रूप से मौजूद रहे. कार्यक्रम के दौरान गौरंगो चटर्जी ने कहा कि ब्रिटिश शासन काल में सुकुमार बनर्जी जैसे श्रमिक नेताओं ने इन ब्रिटिशों के मन और पूरे तन में डर बनाए रखा था. ब्रिटिश शासकों ने सोचा था के सुकुमार बनर्जी को खत्म कर देने से हमारे स्वाधीनता के सपने को भी वह कुचल देंगे, लेकिन वह आंदोलन और भी तीव्र हो गया.वर्तमान समय में हमारे देश के शाशक दलों के विरुद्ध हमें लड़ना होगा वंशगोपाल चौधरी ने कहा कि केंद्र की अर्थनीति की बुनियाद खोखली होती जा रही हैं. तृणमूल और आरएसएस के कारण हमारे समाज और भी खोखली बना रही है , पेपर मिल में 2011 के बाद से श्रमिकों की वेतन चुक्ती नहीं हुई हैं. ठेका मजदूरों को न्यूनतम वेतन भी नहीं मिलता. एकमात्र वाम सरकार ही इनके हित के लिए लड़ रही है. मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा कि साम्राज्यवाद और शोषण के विरुद्ध आंदोलन ही आखरी रास्ता है. एकमात्र लाल झंडा ही श्रमिकों के हित में लड़ाई लड़ सकती है.

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