रानीगंज में इस साल नहीं निकला महावीर अखाड़ा,रह गयी सारी कुर्सियां खाली




 रांनीगंज-महावीर अखाड़ा एक ऐसा अखाड़ा है, जिसका इंतजार रानीगंज में सभीको रहता है. रानीगंज में महाबीर अखाड़ा को लेकर देर रात तक पुलिस मुस्तैद रही. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए शाम से ही रानीगंज आने वाले मार्ग पर नाका चेकिंग चलाई गई. अखाड़ा को लेकर पुलिस की मुस्तैदी का आलम यह था कि भारी वाहनों को शहर में घुसने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. अखाड़ा को लेकर प्रशासन द्वारा पूरे शहर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था ,लेकिन जो 4 अखाड़ा कमिटीयां महावीर अखाड़ा निकालने वाली थीं. उन्होंने भी अखाड़ा न निकालकर विरोध जताया और एक भी महावीर अखाड़ा नहीं निकली.




  ज्ञात हो कि रानीगंज में कुल 11 महावीर अखाड़े निकाली जाते रहे है, लेकिन प्रशासनिक बैठक के बाद रूट में परिवर्तन किए जाने पर अखाड़ा निकालने को लेकर मतभेद हो गया, सभी अखाड़ा कमेटी के सदस्यों ने एक सुर में प्रशासन को कहा कि अतीत में जैसे अखाड़े निकलते रहे हैं यदि उस प्रकार से अखाड़ा निकलने की अनुमति नहीं दी गई तो अखाड़ा नहीं निकाले‌ जाएंगे. लेकिन इसी बीच चार महावीर अखाड़ा समितियों ने शोभायात्रा के साथ अखाड़ा निकालने का निर्णय लिया था जिसकी अनुमति प्रशासन ने दे दी थी.

 पुलिस प्रशासन द्वारा सभी महावीर अखाड़ा को लेकर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। अखाड़ा निकालने के स्थल एवं क्लब मंदिर सहित पुरे क्षेत्र में पुलिस तैनात कर दी गई थी.

जो 4 महावीर अखाड़ा ने शोभायात्रा के साथ अखाड़ा निकाले जाने की अनुमति ली थी. जिसको लेकर पुलिस भी मुस्तैद थी . रानीगंज के मुख्य चौराहा इतवारी मोड़ पर पुलिस कंट्रोल रूम बनाया गया था एवं जगह-जगह कुल नौ स्टॉपिंग ब्रैकेट लगाये गए थ. महामारी के 2 वर्ष बाद फिर से एक बार इस वर्ष मुख्य रूप से इतवारी मोर पर बीआईपी मंच बनाया गया रानीगंज थाने में स्पेशल कंट्रोल रूम बनाई गई थी,सभी को इस मंच के सामने अपने-अपने करतब दिखाने थे.पर कोई अखाड़ा न निकलने के कारण सभी कुर्सियां खाली रह गयी. पुलिस का अनुमान था कि बीते वर्ष की तरह इस वर्ष भी रानीगंज में अखाड़ों को लेकर लोगों का उत्साह चरम पर रहेगा और अखाड़े को लेकर भारी भीड़ इकट्ठा होगी. इसलिए एसीपी तथागत पांडे और एसीपी श्रीमंत बनर्जी ,रांनीगंज थाना प्रभारी के नेतृत्व में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी और सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए थे, लेकिन प्रशासन द्वारा नियमों का हवाला देते हुए एक भी अखाड़ा नहीं निकाला गया .ज्ञात हो कि रानीगंज में अखाड़ों का डेढ़ सौ वर्ष पुराना इतिहास है, लेकिन इस वर्ष अखाड़े नहीं निकाले गए और इसके लिए अखाड़ा कमेटियों ने प्रशासन द्वारा बनाए गए नियमों को जिम्मेदार ठहराया. 


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