रांनीगंज- रानीगंज की पारंपरिक सार्वजनिक पूजाओं में से एक सोलह आना दुर्गा पूजा, जिसे प्रजापति दुर्गा के नाम से भी जाना जाता है, इस पूजा की खासियत है की पूजा के साथ -साथ विसर्जन यहां की मुख्य आकर्षण होती है,लोग शाम से इस विसर्जन का प्रत्येक चौराहा मोड़ पर लोगो का हजूम उमड़ पड़ता है. बुधवार शाम को हुई तेज बारिश के कारण यहां का विसर्जन की शोभायात्रा फीकी हो गयी . देर सन्ध्या को निकली शोभायात्रा .हालांकि पिछले दो साल कोरोना काल के कारण विसर्जन छोटे आकार में किया गया था, लेकिन पूजा आयोजकों ने पुरानी प्रथा का पालन करते हुए लक्ष्मी पूजा के बाद बुधवार को पूजा के बिसर्जन चरण को फिर से पूरा किया . इस दुर्गा पूजा के 126वें वर्ष होने के कारण मां की शोभायात्रा में 126 ढाकी ढाक बजाएंगे .भीड़ का मनोरंजन करने के लिए एक दिलचस्प चाइनीज लाइटिंग, क्लब बैंड , लेडीज डांडिया डांस, दो जेंट्स क्लब बैंड , नाचन बैंड, कुरकुरी ढोल, सैक्सोफोन, हरिबोल ट्रूप के साथ विभिन्न वेशभूषा में विष्णु केशरी के नेतृत्व में भारत माता, देश के फौजी, शराबी चार्ली चैपलिन, राधाकृष्ण, पीके, हठात बाबू, सोशल मीडिया के कच्चा बादाम, हिंदी सिनेमा के पुष्पा जैसे बहुआयामी मनोरंजक चरित्र इसकी शोभा बढ़ा रहे थे. इसके साथ ही रंग-बिरंगी रोशनी थी. जिसमें गिटार बजाते भूत, साइकिल चलाना, अंधेरे में भूतों का आना-जाना शामिल था, और बाउल संगीत को रौशनी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया था. बुधवार की सुबह से ही क्लब के सभी सदस्य सब कुछ सुचारू रूप से पूरा करने के लक्ष्य में जुटे हुए थे.शोभायात्रा शहर की परिक्रमा करते परम्परा के अनुसार तारबंग्ला स्तिथ कुलु पोखर में मूर्ति विसर्जित की गयी.




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