धनबाद : ब्रह्मविद्या विहंगम योग संस्थान के धनबाद शाखा द्वारा एक दिवसीय भजन प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार को धनबाद के गोल्फ ग्राउंड के निकट स्थित न्यू टाउन हॉल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम भावी सद्गुरु संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज का स्वागत करने के लिए शिष्यों ने संत प्रवर का स्वागत करते हुए बैंक मोड़ से शोभायात्रा लेकर शहर की परिक्रमा करते हुए न्यू टाउन हॉल तक पहुंचे जहां शिष्यों ने पुष्प वर्षा कर संत प्रवर का स्वागत किया संत प्रवर ने सर्वप्रथम ध्वजारोहण किया। मंचीय कार्यक्रम के दौरान आश्रम के शिष्यों एवं विहंगम योग की भजन गायिका रंजू सिंह ने सु मधुर भजन प्रस्तुत किए। मंच के कार्यक्रम में सद्गुरु भगवान सहित सभी अतिथियों का स्वागत किया गया उपस्थित अतिथियों ने विहंगम योग संस्थान के आचार्य सदगुरु श्री स्वतंत्र देव जी महाराज एवं विज्ञान देव महाराज के चरणो में माल्यार्पण किए। कार्यक्रम में ब्रह्मविद्या विहंगम योग के वर्तमान आचार्य सदगुरु श्री स्वतंत्र देव जी महाराज द्वारा अमृतवाणी एवं भावी सद्गुरु संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज द्वारा दिव्य वाणी प्रवाहित हुई। दिव्य वाणी में श्री विज्ञान देव जी महाराज ने शिष्य एवं जिज्ञासु को संबोधित करते हुए कहा कि हम सभी शांति चाहते हैं। शांति प्राप्ति के लिए पहले मन को स्थिर करना होगा। बिना मन को स्थिर किए हुए शांति प्राप्त नहीं हो सकती एवं मन को स्थिर एवं शांत करने का तरीका सिर्फ विहंगम योग बतलाता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर का महान प्रसाद है मानव जीवन, हमें यह जीवन क्यों मिला है इसे हमें जानना है। हमें सर्वप्रथम अपने आप को जानना है आत्मा को पहचानना है क्योंकि आत्मा के अंदर ही परमात्मा मौजूद है। हमारे ऋषि-मुनियों ने उस परम तत्व का साक्षात्कार किया है। हम उन्हीं ऋषि मूनियों के बताए हुए मार्ग पर हम चल रहे हैं। उनके प्रति हमारी यही श्रद्धा है। उन्होंने आगे कहा कि आज विश्व के वैज्ञानिक विहंगम योग पर रिसर्च कर रहे हैं कि विहंगम योगी किस तरह से विचारों के तरंगों पर नियंत्रण प्राप्त करता है।विचारों के उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण प्राप्त करता है। विहंगम योग में प्रथम भूमि की साधना में अल्फा तरंगे बढ़ती हैं। जिससे साधक शांति अवस्था को प्राप्त करता है। विहंगम योगी अपने योग साधना के बल पर धारा के उलट चाल चलता है। धारा के विपरीत चलने की विद्या विहंगम योग बतलाती है। उन्होंने देश राज्य के विषय में कहा कि अध्यात्मिक शक्ति ही देश एवं समाज का हित कर सकती है क्योंकि उसके अंदर मैत्री भाव रहता है जो किसी का बुरा नहीं चाहता। योगी ही उपयोगी होता है।
अंत में उन्होंने विश्व की धरोहर बनने जा रही उत्तर प्रदेश के वाराणसी के उमराहा में स्वर्वेद महामंदिर धाम के विषय में कहा कि वहां विश्व का सबसे बड़ी साधना स्थली बन रही है। इसका उद्घाटन 2 वर्षों पश्चात होना तय है उस साधना स्थली में एक साथ 20 हजार साधक एक साथ बैठकर साधन कर पाएंगे।
आचार्य सदगुरु श्री स्वतंत्र देव जी महाराज ने अपने अमृतवाणी में शिशु को संबोधित करते हुए कहा कि शरीर के द्वारा हम योग करते हैं पर एक योग और है जो शरीर के अंदर किया जाता है। उस योग को करने के लिए हमें मन पर नियंत्रित करना पड़ता है, क्योंकि मन ही संसार है मन नहीं रहेगा तो यह संसार भी नहीं है। मन की शक्ति संसार में लगी रहती है। पहले योग करने के लिए हमें मन को एक स्थान पर स्थिर करना पड़ता है। मन को स्थिर करने का ज्ञान विहंगम योग में मिलता है। उन्होंने योग के पथ पर आगे बढ़ने के लिए मन माया पर नियंत्रित करने के लिए बताया। उन्होंने कहा कि जीव माया एवं प्रकृति के बंधन में जकड़ा हुआ है। जब तक यह बंधन है तब तक जीव आत्म दर्शन नहीं कर सकता। यह ज्ञान विहंगम योग बतलाता है कि योग साधना द्वारा कैसे हम आत्म दर्शन कर परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं। यह ज्ञान पुस्तक पढ़ने में नहीं मिलता यह वाचक ज्ञान तर्क का विषय नहीं है अध्यात्म प्राप्ति के लिए कितना को केंद्र पर रखना पड़ता है और योग साधना करते हुए हम संसार की कार्य भी करते रहते हैं। ठीक उसी तरह से इस तरह से राजस्थान की औरतें गगरी को सर पर रखकर सखियों संग बात करते हुए चलती रहती है परंतु उनकी चेतना गगरी पर रहती है कि कहीं गगरी गिरकर फूट ना जाए। उन्होंने साधना के विषय में कहा कि हमें भोगों से दूर रहकर साधना करना है। इसके लिए साधना करते हुए सद्गुरु से प्रार्थना करनी पड़ती है। सद्गुरु कृपा से साधन होता है और आत्म दर्शन होता है। यह ज्ञान सिर्फ सद्गुरु ज्ञान से प्राप्त होता है। और यह विहंगाम योग में है यह ज्ञान पूरे ब्रह्मांड में विहंगम योग के अलावा कहीं नहीं मिलेगा। उन्होंने महा ग्रंथ स्वर्वेद के विषय में कहा कि स्वर्वेद जैसा ग्रंथ पूरे विश्व में कहीं नहीं है। स्वर्वेद के माध्यम से अध्यात्म की क्रांति आ चुकी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब वार्षिक उत्सव में वाराणसी आए थे। तब उन्होंने खुद कहा था कि स्वर्वेद महामंदिर जब बनकर तैयार हो जाएगा तो यह पूरे विश्व का एक नजराना होगा। साथ ही उन्होंने 2 वर्ष के अंदर कार्य को पूरा करने को कहा है। एवं उन्होंने कहा है कि 2 वर्ष बाद में ही स्वर्वेद महामंदिर का उद्घाटन करूंगा। इसलिए सद्गुरु स्वतंत्र देव जी महाराज ने शिष्यों से आह्वान किया कि जल्द से जल्द स्वर्वेद महामंदिर में सहयोग देकर निर्माण कार्य को पूरा किया जाए। कार्यक्रम को सफल बनाने में विहंगम योग धनबाद शाखा के अधिकारियों का मुख्य योगदान रहा। जिसमें मुख्य रुप से धनबाद के संयोजक श्री तान सिंह, सहसंयोजक श्री विनोद यादव, संरक्षक विनोद कुमार सिंह विहंगम योग बंगाल के प्रभारी जीपी सिंह का विशेष योगदान रहा। इसके अलावे कार्यक्रम में विहंगम योग संत समाज के स्तंभ विहंगम योग संदेश पत्रिका के संपादक सुखनंदन सिंह सदर सहित झारखंड के विहंगम योग संस्थान के सभी पदाधिकारी भी मौजूद थे। कार्यक्रम का लाभ लेने के लिए धनबाद बोकारो पश्चिम बंगाल के आसनसोल सहित कई क्षेत्रों से संगम युग के अनुयाई उपस्थित हुए।



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