शराब पीने वालों के लिए अच्छी खबर, राज्य में शराब के दामों में भारी कटौती


आसनसोल : राज में शराब पीने वालों के लिए अच्छी खबर आई है। सरकार द्वारा शराब के उत्पादन शुल्क में संशोधन किया गया है। जिसके बाद राज्य सरकार ने भी उत्पाद शुल्क कम करने के लिए विदेशी शराब के दामों में कटौती कर रही है। राज्य में अगले 18 नवंबर से विदेशी शराब के दाम कम हो रहे हैं। बीयर की कीमतें भी सस्ती होने जा रही हैं। राज्य के वित्त विभाग के आदेशानुसार दिनांक 3 नवंबर, 2021 द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने उत्पाद शुल्क की दर में संशोधन किया है। राज्य सरकार उत्पाद शुल्क कम करने के लिए कीमत कम कर रही है। नतीजतन, भारत में उत्पादित सभी विदेशी वाइन और बियर की कीमतें राज्य में कम हो जाएंगी। नतीजतन, बाजार के सामान्य बीयर की बिक्री में काफी इजाफा होगा। इसलिए प्रशासन को उम्मीद है कि राज्य के कुल उत्पाद राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी। 

शराब की कीमतें इस प्रकार रहेंगी

उत्पाद शुल्क घटाने से राज्य में शराब की कीमतें 25 फीसदी कि दर से कम हो जाएंगी। 650 मिली बोतल की कीमत 100 रुपये से 450 रुपये तक होगी और अधिकतम एमआरपी 2,000 रुपये होगी। और 2,200-2,300 रुपये के एमआरपी के मामले में कीमत 500-600 रुपये तक कम की जाने का अंदेशा है उदाहरण के तौर पर 650 मिली रॉयल स्टैग की कीमत 980 रुपये से घटाकर 610 रुपये की जाएगी। रॉयल चैलेंज को 1000 रुपये से घटाकर 630 रुपये किया जाएगा। ब्लेंडर्स प्राइड को 1350 रुपये से घटाकर 920 रुपये किया जाएगा। मैकडॉवेल सेलिब्रेशन रम को 640 रुपये से घटाकर 540 रुपये किया जाएगा एंटिकिटी ब्लू को 1810 रुपये से घटाकर 1200 रुपये किया जाएगा। 

त्योहारों के दौरान सबसे ज्यादा राजस्व शराब से प्राप्त हुए है। परिणाम स्वरूप राज्य सरकार ने ये सौगात दिया हैं। हालांकि मेदिनीपुर के एक व्यापारी ने कहा, जब तक पुराना स्टॉक समाप्त नहीं हो जाता तब तक स्टोर मे नए मूल्य का स्टॉक नहीं मिलेंगे। वहीं, राज्य के आबकारी विभाग के एक सरकारी अधिकारी ने मीडिया से कहा, ”चालू वित्त वर्ष में उत्पाद शुल्क संग्रह का लक्ष्य 18,100 करोड़ रुपये है। हम सात माह में अब तक एकत्रित राजस्व में लक्ष्य को पूरा करने को लेकर काफी आशावादी हैं। कीमत कम हुई तो बिक्री जरूर बढ़ेगी लेकिन, अगर शराब की कीमत कम हो जाती है, तो क्या सरकार के कुल उत्पाद शुल्क संग्रह में कमी आएगी? उस स्थिति में, राज्य इस वित्तीय घाटे को दैनिक व्यय और पूंजीगत व्यय के लिए कैसे कवर करेगा? एक प्रशासनिक अधिकारी ने जवाब दिया, ”राजस्व संग्रह में बिल्कुल भी कमी नहीं आएगी। इसके विपरीत, यदि कीमतें गिरती हैं, तो बिक्री बढ़ेगी, और इसी तरह हमारे उत्पाद शुल्क संग्रह में भी वृद्धि होगी।

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