जामुड़िया-पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी पारा चढ़ते ही विवादों का दौर शुरू हो गया है। आसनसोल के सांसद और तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता शत्रुघ्न सिन्हा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोपों में घिर गए हैं। जामुड़िया में चुनाव प्रचार के दौरान उनकी गाड़ी पर लगी नील बत्ती और अशोक स्तंभ ने एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है।
क्या है पूरा मामला?
रविवार को शत्रुघ्न सिन्हा जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल प्रत्याशी हरेराम सिंह के समर्थन में आयोजित एक कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जिस वाहन से वे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, उस पर न केवल नील बत्ती लगी थी, बल्कि गाड़ी के सामने भारत का राजकीय प्रतीक 'अशोक स्तंभ' भी लगा हुआ था। चुनाव प्रचार के दौरान सरकारी तामझाम और शक्ति प्रदर्शन के इन प्रतीकों का उपयोग स्पष्ट रूप से चुनाव नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
विवाद बढ़ा तो हटवाए प्रतीक
मीडिया कर्मियों द्वारा सवाल पूछे जाने पर शत्रुघ्न सिन्हा ने शुरुआत में इसे एक "छोटी घटना" करार देकर टालने की कोशिश की। हालांकि, जैसे ही मौके पर हंगामा बढ़ा और कैमरों की नजर पड़ी, सांसद ने तुरंत अपने सचिव को निर्देश देकर गाड़ी से बत्ती और अशोक स्तंभ हटवा दिए। लेकिन तब तक विपक्षी दलों को सत्ताधारी दल पर हमला करने का बड़ा मुद्दा मिल चुका था।
भाजपा का तीखा प्रहार: 'कानून से ऊपर नहीं हैं सांसद'
इस घटना को लेकर भाजपा प्रत्याशी बीजन मुखर्जी ने तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे सत्ता का अहंकार बताते हुए कहा: की यह स्पष्ट रूप से सत्ता का दुरुपयोग और चुनाव आयोग की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। एक सांसद, जो खुद को कानून का रखवाला कहता है, वह चुनाव प्रचार में नील बत्ती का उपयोग कैसे कर सकता है? क्या तृणमूल नेता खुद को कानून से ऊपर समझते हैं? हमने चुनाव आयोग से इसकी लिखित शिकायत की है और सख्त कार्रवाई की मांग की है।"
चुनावी माहौल में बढ़ी सरगर्मी
औद्योगिक बेल्ट जामुड़िया के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में इस घटना ने राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है। 2026 के चुनावों से ठीक पहले प्रशासनिक सतर्कता और आचार संहिता के पालन पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना यह है कि चुनाव आयोग इस 'VVIP' उल्लंघन पर क्या संज्ञान लेता है।


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