रानीगंज - रानीगंज शहर को कोयला खनन और धसान के खतरे से बचाने के लिए 'रानीगंज बचाओ मंच' ने गुरुवार को एनएसबी रोड स्थित मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी अस्पताल के सामने जोरदार धरना प्रदर्शन किया. मंच ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी राजनीतिक दल या प्रत्याशी इस आंदोलन का समर्थन नहीं करेगा, उसे आगामी चुनाव में वोट नहीं दिया जाएगा.
प्रशासनिक उदासीनता पर फूटा गुस्सा
धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मंच के संयुक्त संयोजक डॉ. एस. के. बासु ने कहा कि ओपन कास्ट माइंस के कारण रानीगंज के वजूद पर संकट मंडरा रहा है. उन्होंने कहा, हमने विधायक, सांसद और जिला शासक तक अपनी गुहार लगाई, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं. किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस लड़ाई में हमारा साथ नहीं दिया. डॉ. बासु ने विज्ञान का हवाला देते हुए सवाल किया कि यदि गंगा के नीचे टनल बनाकर मेट्रो चलाई जा सकती है, तो आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रानीगंज को बचाते हुए कोयला उत्पादन क्यों नहीं हो सकता?
वोट हमारा अधिकार, पर अस्तित्व पहली प्राथमिकता
संयुक्त संयोजक गौतम घटक ने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि शहर के अस्तित्व की लड़ाई है.उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही सभी दल वोट मांगने आएंगे, लेकिन शहर को बचाने में किसी की दिलचस्पी नहीं है.उन्होंने कहा, हम विकास और कोयला उत्पादन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर लोगों की जिंदगी को नर्क नहीं बनने देंगे. वोट देना हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है और हम उसका प्रयोग करेंगे, लेकिन सोच-समझकर.
एकजुटता का आह्वान
वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र प्रसाद खैतान ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं बल्कि पूरे रानीगंज का है और इसे सभी को मिलकर लड़ना होगा. मंच ने एलान किया कि जब तक ओपन कास्ट माइंस के फैसले को रद्द नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
दो घंटे तक चला प्रदर्शन, गणमान्य रहे उपस्थित
प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक चले इस धरना प्रदर्शन में रानीगंज के कई विशिष्ट नागरिकों और सदस्यों ने हिस्सा लिया.इस मौके पर मुख्य रूप से बलराम रॉय, डॉ. अरूपानंद पॉल, विद्युत पांडेय, डॉ. एस. माझी और पवन टण्डन सहित बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी मौजूद थे.



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