मालदा (पश्चिम बंगाल) | पीबी टीवी: एक तरफ कलेजे के टुकड़े और जीवनसंगिनी की लाशें मुर्दाघर में पड़ी थीं, तो दूसरी तरफ 'कागजी कार्रवाई' का दबाव। मालदा जिले से सामने आई यह हृदयविदारक घटना मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली है। यहाँ एक शिक्षक को अपने नौ महीने के मासूम बेटे और पत्नी की मौत के चंद घंटों बाद, अस्पताल के बजाय सरकारी सुनवाई केंद्र (Hearing Centre) की दौड़ लगानी पड़ी।
हादसे ने छीनी खुशियाँ, कागजों ने बढ़ाई बेबसी
घटना गाजोल थाना अंतर्गत खरदहिल इलाके की है। एमडी यासीन अंसारी, जो कालियाचक के सुजापुर नयूमोजा हाई मद्रासा में शिक्षक हैं, अपनी पत्नी हलीमा खातून और नौ महीने के बेटे आरिफ हसन के साथ एक बेहद जरूरी काम से बाहर निकले थे। यासीन और उनकी पत्नी के दस्तावेजों में कुछ स्पेलिंग (वर्तनी) की गलतियाँ थीं, जिन्हें सुधारने के लिए उन्हें आज सुनवाई के लिए बुलाया गया था।
कल रात जब यह परिवार ई-रिक्शा (टोटो) से आमबाजार की ओर जा रहा था, तभी सुस्तानी इलाके के पास टोटो अनियंत्रित होकर पलट गया। इस भीषण हादसे में:
- पत्नी हलीमा खातून की मौके पर ही मौत हो गई।
- 9 महीने के बेटे आरिफ ने अस्पताल पहुँचकर दम तोड़ दिया।
- आँखों में आँसू, हाथों में फाइल: पत्थर दिल कर देने वाला मंजर
आज सुबह मालदा मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम विभाग में माँ-बेटे के शव पड़े थे। नियति का क्रूर मजाक देखिए कि जिस कागजी सुधार के लिए यासीन सपरिवार घर से निकले थे, उसी सुनवाई केंद्र पर उन्हें आज हाजिर होना अनिवार्य था। कानूनी प्रक्रिया और नौकरी से जुड़ी अनिवार्यता के कारण, बदहवास यासीन को अपने परिजनों के शव छोड़कर भारी मन से सुनवाई केंद्र भागना पड़ा।
"अस्पताल परिसर में मौजूद हर शख्स की आँखें उस समय नम हो गईं, जब उन्होंने एक पिता को अपनी संतान और पत्नी की अर्थी उठने से पहले सरकारी दस्तावेजों की लड़ाई लड़ते देखा। यह दृश्य प्रशासन और व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।"
सहकर्मियों और इलाके में शोक की लहर
यासीन के सहकर्मियों और स्थानीय निवासियों ने इस घटना पर गहरा दुख जताया है। लोगों का कहना है कि क्या हमारी व्यवस्था इतनी संवेदनहीन हो चुकी है कि एक शोकाकुल व्यक्ति को ऐसी स्थिति में भी राहत नहीं दी जा सकती? फिलहाल, पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है।

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