रानीगंज: साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब बैंक परिसर और उनके कर्मियों के नाम पर भी ग्राहकों के साथ ठगी हो रही है. ताजा मामला रानीगंज स्थित बंधन बैंक की शाखा का है, जहाँ अपनी कंपनी का करंट अकाउंट खुलवाने आए एक व्यवसायी के खाते से 2 लाख 20 हजार रुपये गायब होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. पीड़ित ने इसके लिए बैंक कर्मियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है.
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित शिव शंकर सिंह ने बताया कि वे अपनी कंपनी 'महाबीर रोड लाइन्स' के नाम पर करंट अकाउंट खुलवाने के लिए बंधन बैंक की रानीगंज शाखा गए थे. बैंक द्वारा बताई गई सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के दौरान, बीते 2 फरवरी को बैंक कर्मी रघुवीर यादव नामक व्यक्ति ने उनसे 'उद्यम आधार' के लिए ओटीपी मांगा. विश्वास में आकर उन्होंने ओटीपी दे दिया. इसके बाद रघुवीर के कहने पर ही उन्होंने सोमव्रत सिंह नामक एक अन्य व्यक्ति को भी ओटीपी बताया.
3 फरवरी की सुबह हुआ बड़ा फर्जीवाड़ा
हैरानी की बात यह है कि ओटीपी साझा करने के अगले ही दिन, यानी 3 फरवरी की सुबह शिव शंकर सिंह के खाते से दो बार में कुल 2 लाख 20 हजार रुपये कट गए. पीड़ित का कहना है कि उन्होंने बैंक के अधिकृत व्यक्ति समझकर ही जानकारी साझा की थी, जिसका फायदा उठाकर यह बड़ी ठगी की गई.
पीड़ित शिव शंकर सिंह ने इस पूरी घटना के लिए बैंक प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कुछ गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आईएमपीएस के तहत एक बार में मात्र 50 हजार रुपये ही ट्रांसफर हो सकते हैं, तो एक बार में इतनी बड़ी राशि कैसे कट गई? उन्होंने संदेह जताया है कि इसमें निश्चित रूप से बैंक के ही किसी कर्मचारी की मिलीभगत है. घटना के बाद से पीड़ित बैंक मैनेजर से मिलने के लिए चक्कर काट रहे थे, लेकिन मैनेजर की अनुपस्थिति के कारण गुरुवार को ही वे लिखित शिकायत दर्ज करा सके.
रुपयों की वसूली और न्याय की गुहार लगाते हुए पीड़ित ने आसनसोल साइबर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.इधर, बैंक प्रबंधन की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है. ज्ञात रहे कि बैंक कभी भी फोन पर या व्यक्तिगत रूप से आपसे गोपनीय ओटीपी या पासवर्ड नहीं मांगता है.हमेशा यह हिदायत दी जाती है कि किसी भी परिस्थिति में अपनी बैंकिंग जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें.



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