प्रिंसिपल की अनुपस्थिति में टीचर इंचार्ज ने ज्ञापन लेने से किया इनकार; छात्रों ने लगाया शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त करने का आरोप
रानीगंज- पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा निर्धारित फीस के नियमों का उल्लंघन कर रानीगंज के विभिन्न बांग्ला माध्यम स्कूलों में अभिभावकों से अधिक पैसे वसूलने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. सोमवार को वामपंथी छात्र संगठन एसएफआई के सदस्यों ने रानीगंज हाई स्कूल में इस धांधली के खिलाफ ज्ञापन सौंपने की कोशिश की, लेकिन स्कूल में व्याप्त गतिरोध के कारण उन्हें बैरंग लौटना पड़ा.
₹240 की जगह वसूले जा रहे ₹600: सुकांत चटर्जी
एसएफआई नेता सुकांत चटर्जी ने स्कूलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने कक्षा 5 से 12 तक के लिए ₹240 की फीस निर्धारित की है. इसके बावजूद रानीगंज के स्कूलों में मनमानी चल रही है.उन्होंने कहा, "कहीं ₹600 तो कहीं ₹350 और ₹450 वसूले जा रहे हैं. यह पूरी तरह गैरकानूनी है।" चटर्जी ने आगे बताया कि जब वे रानीगंज हाई स्कूल पहुंचे तो वहां प्रिंसिपल मौजूद नहीं थे और टीचर इंचार्ज ने उनका ज्ञापन लेने से साफ मना कर दिया.
अभिभावकों की मजबूरी: "रसीद ₹600 की है, पर नियम का पता नहीं"
स्कूल परिसर में मौजूद कुछ अभिभावकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए मजबूरी में पैसे दे रहे हैं. एक अभिभावक ने कहा, हमें ₹600 की पक्की रसीद दी गई है, लेकिन हमें यह नहीं पता था कि सरकारी नियम केवल ₹240 का है. बच्चों का एडमिशन करवाना है, इसलिए हमें ₹360 अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं.
इन स्कूलों में भी होगा आंदोलन
एसएफआई ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन केवल रानीगंज हाई स्कूल तक सीमित नहीं रहेगा. आने वाले दिनों में संगठन सीआरसोल बालिका विद्यालय,सीआरसोल राज हाई स्कूल,जमुनामयी बालिका विद्यालय में भी विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने की तैयारी में है.
शिक्षा व्यवस्था पर साधा निशाना
छात्र संगठन ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि स्कूलों में शिक्षा का बुनियादी ढांचा ध्वस्त हो चुका है. मिड-डे मील में चोरी हो रही है और शिक्षण संस्थानों में राजनीति का बोलबाला है. सुकांत चटर्जी ने कहा कि वे इस भ्रष्टाचार और बढ़ी हुई फीस के खिलाफ जल्द ही जिला स्कूल निरीक्षक को भी ज्ञापन सौंपेंगे और जब तक फीस पर रोक नहीं लगती, आंदोलन जारी रहेगा.




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