बांकुड़ा- पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में रविवार को विश्व प्रसिद्ध और अनोखा 'मुड़ी मेला' हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ.द्वारकेश्वर नदी के रेतीले तट पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग जुटे, जहाँ नदी के पानी में मुड़ी भिगोकर एक साथ खाने की सौ साल पुरानी परंपरा का निर्वहन किया गया.
इस मेले की शुरुआत संजीवनी माता आश्रम में होने वाले हरिनाम संकीर्तन से जुड़ी है. पुराने समय में लोग जंगल के रास्ते घर लौटने के बजाय रात आश्रम में बिताते थे और सुबह नदी किनारे मूरी खाकर प्रस्थान करते थे. आज यही जरूरत एक बड़े उत्सव में बदल चुकी है.माघ महीने की चौथी तारीख को आयोजित होने वाले इस मेले में अब लोग मूरी के साथ चॉप, बेगुनी, घुगनी, नारियल के लड्डू और चनाचूर जैसे पकवानों का भी आनंद लेते हैं.
आठ से अस्सी तक, हर उम्र के लोग शामिल
मेले के संयोजक पार्थ चंद ने बताया कि केन्जाकुड़ा और आसपास के 20 गांवों सहित अन्य राज्यों से भी लोग यहाँ पहुँचते हैं. नदी किनारे रेत में गड्ढा खोदकर पानी निकालना और सामूहिक रूप से मुड़ी खाना इस मेले की सबसे बड़ी विशेषता है. कड़ाके की ठंड के बीच धूप का आनंद लेते हुए परिवार और दोस्तों के साथ मुड़ी खाना एकता और भाईचारे का प्रतीक बन गया है.

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