खास आकर्षण: ₹1.5 लाख की भारत के संविधान की पुस्तक की बिक्री, पुराने उपन्यासों को खोज कर खरीद रहे लोग
रानीगंज: रानीगंज के सियारसोल राजबाड़ी मैदान में आयोजित 7 दिवसीय पुस्तक मेला इस वर्ष अपने नए कलेवर और भव्यता के साथ चर्चा का विषय बना हुआ है. मेले का विस्तार इस बात का गवाह है कि स्मार्टफोन और इंटरनेट के इस दौर में भी लोगों का किताबों के प्रति प्रेम कम नहीं हुआ है, बल्कि बढ़ा है.
पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा मेले का स्वरूप
इस वर्ष पुस्तक मेले का स्वरूप पिछले वर्ष के मुकाबले कहीं बड़ा है. जहां पिछली बार पुस्तकों के 42 स्टॉल थे, वहीं इस बार इनकी संख्या बढ़कर 48 हो गई है. कुल मिलाकर 100 स्टॉल मेले की शोभा बढ़ा रहे हैं.पुस्तक प्रेमियों का बढ़ता रुझान देखकर प्रकाशक भी उत्साहित हैं,हालांकि इन 100 पुस्तक स्टालों में 52 स्टाले खाने-पीने की वस्तु,एनजीओ तथा कई व्यापारिक प्रतिष्ठानो तथा सरकारी विभागों के भी है.
डेढ़ लाख की ' भारतीय संविधान' पुस्तक रही आकर्षण का केंद्र
मेले में कोलकाता के 'स्कॉलर बुक' के मालिक अरुणाभ बनर्जी ने एक विशेष उपलब्धि साझा की. उनके स्टॉल पर भारत सरकार द्वारा प्रकाशित भारत के संविधान की एक विशेष प्रति 1.5 लाख रुपये में बिकी.इस बेशकीमती किताब को रानीगंज टीडीबी कॉलेज के जूलॉजी विभाग के एक पूर्व प्रोफेसर ने खरीदा. इस किताब के साथ एक एटलस भी उपहार स्वरूप दिया जा रहा है. रानीगंज के लोगों की इसी रुचि को देखते हुए स्कॉलर बुक ने इस बार 1 के बजाय 5 स्टॉल लगाए हैं.
पुरानी किताबों और उपन्यासों का जलवा
मेले में 'एसके बुक्स' द्वारा लगाए गए पुरानी किताबों के स्टॉल पर पाठकों की भारी भीड़ देखी जा रही है. विशेषकर आनंद पब्लिशर्स के पुराने उपन्यास और कहानियों की किताबों की मांग सबसे अधिक है. लोग अपनी पसंदीदा किताबें 50 प्रतिशत तक की छूट पर खरीद रहे हैं. यहाँ अंग्रेजी और बांग्ला साहित्य का बड़ा संग्रह उपलब्ध है.
हिंदी किताबों की कमी पर आयोजकों की सफाई
मेले में जहां बांग्ला और अंग्रेजी किताबों की भरमार है, वहीं हिंदी साहित्य के पाठकों को इस बार भी निराशा हाथ लगी है. मेले से हिंदी की किताबें लगभग गायब दिखीं. इस संबंध में आयोजकों ने बताया कि हिंदी पुस्तकों के लिए स्टॉल नंबर 55 आरक्षित किया गया था, लेकिन तकनीकी कारणों से वह स्टॉल भी एसके बुक्स द्वारा ले लिया गया.
विधायक तापस बनर्जी ने जताई खुशी
रानीगंज के विधायक तापस बनर्जी ने मेले का दौरा कर प्रसन्नता व्यक्त की.उन्होंने कहा, "रानीगंज जैसे छोटे शहर में डेढ़ लाख रुपये की एक किताब का बिकना पुस्तक मेले की बड़ी सफलता है.भारतीय संविधान के इस पुस्तक में संविधान गठन के दौरान मौजूद तत्कालीन 545 नेताओं का हस्ताक्षर भी मौजूद है.उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल और इंटरनेट के कारण किताबों के प्रति रुझान कम हुआ था, लेकिन हमारे कार्यकाल में पिछले 4 वर्षों से लग रहे इस मेले ने साबित कर दिया है कि लोग अब वापस किताबों की ओर लौट रहे हैं. यह एक सुखद एहसास है.
मेले में रोजाना सांस्कृतिक कार्यक्रम
सात दिवसीय पुस्तक मेले की शाम उस वक्त बेहद खास हो गई, जब प्रख्यात बांग्ला गायक और राज्य के मंत्री इंद्रनील सेन ने वहां शिरकत की. पुस्तक मेले के सांस्कृतिक मंच से जब उन्होंने अपने चुनिंदा गीतों की प्रस्तुति दी, तो वहां मौजूद जनसैलाब मंत्रमुग्ध हो गया.
स्टॉल-स्टॉल घूमे मंत्री, बच्चों का बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम के दौरान मंत्री इंद्रनील सेन ने मेले के विभिन्न बुक स्टॉलों का भ्रमण किया. उन्होंने न केवल प्रकाशकों से बातचीत की, बल्कि मेले में आए छोटे-छोटे बच्चों के साथ भी काफी समय बिताया. उन्होंने बच्चों को दुलारते हुए जीवन में किताबों के महत्व को समझाया. उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में भी ज्ञान का असली स्रोत और सबसे अच्छा मित्र 'किताबें' ही हैं.
संगीत और साहित्य का अनूठा संगम
सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान इंद्रनील सेन ने जब माइक संभाला, तो पूरा राजबाड़ी मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. उनके लोकप्रिय बांग्ला गानों ने मेले के साहित्यिक माहौल में संगीत की मिठास घोल दी. पाठकों और संगीत प्रेमियों के लिए यह एक यादगार अनुभव रहा, जहाँ उन्हें अपनी पसंदीदा किताबों के साथ-साथ पसंदीदा गायक को लाइव सुनने का मौका मिला.
सांस्कृतिक अनुष्ठानों से रौनक बरकरार
गौरतलब है कि सियारसोल पुस्तक मेले में किताबों की बिक्री के साथ-साथ रोजाना रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. आयोजकों का कहना है कि इंद्रनील सेन जैसी नामचीन हस्तियों के आने से मेले की गरिमा बढ़ी है और इससे स्थानीय युवाओं व छात्रों में पढ़ने के प्रति नई प्रेरणा जगेगी.




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