रानीगंज: आधुनिकता और डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच किताबों की महत्ता को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को सियारसोल राजबाड़ी मैदान में 'रानीगंज पुस्तक मेला-2026' का शुभारंभ हुआ.रानीगंज पुस्तक मेला समिति और पश्चिम बंगाल सरकार के जनशिक्षा प्रसार एवं पुस्तकालय सेवा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह मेला 22 जनवरी तक चलेगा. मेले की शुरुआत रानीगंज के विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों द्वारा निकाली गई रंग-बिरंगी शोभायात्रा “किताब के लिए चलो” के साथ हुई.
विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन
मेले का औपचारिक उद्घाटन आसनसोल के जिलाधिकारी एस. पोन्नबलम, स्थानीय विधायक तापस बनर्जी, काजी नजरुल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उदय बंद्योपाध्याय, आसनसोल रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी सौमात्मानंद जी महाराज एवं आसनसोल नगर निगम के चेयरमैन सह मेला समिति अध्यक्ष अमरनाथ चटर्जी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. इस अवसर पर जिला ग्रंथागार समिति के एस.आई. सुशोभन कोनार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. उद्घाटन के पश्चात अतिथियों द्वारा एक नवीन पुस्तक का विमोचन भी किया गया.
"किताबें ही सच्ची मित्र": जिलाधिकारी
सभा को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी एस. पोन्नबलम ने कहा, "जब सब साथ छोड़ देते हैं, तब पुस्तकें ही हमारा सहारा बनती हैं.मोबाइल और सोशल मीडिया के युग में पुस्तकों से दूरी बनाना ठीक नहीं है. वहीं, कुलपति प्रो. उदय बंद्योपाध्याय ने कहा कि शिक्षा रोजगार देती है, लेकिन दीक्षा आत्मिक उन्नति करती है.उन्होंने सियारसोल की मिट्टी और काजी नजरुल इस्लाम की स्मृतियों का भी उल्लेख किया. स्वामी सौमात्मानंद जी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार योग शरीर को स्वस्थ रखता है, उसी प्रकार पुस्तक अध्ययन मन को सशक्त बनाता है.
विधायक तापस बनर्जी ने बताया कि इस वर्ष मेले में कुल 100 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें से 48 स्टॉल विशेष रूप से पुस्तकों के हैं. इनमें हिंदी और उर्दू साहित्य के स्टॉल भी शामिल हैं. काजी नजरुल विश्वविद्यालय द्वारा भी एक विशेष स्टॉल लगाया गया है, जिसका उद्घाटन फीता काटकर किया गया.
मेला कमिटी के सदस्य शिक्षक देवनारायन दास ने बताया कि मेला प्रतिदिन दोपहर 2:00 बजे से रात 9:30 बजे तक चलेगी, आम जनता के लिए प्रवेश निःशुल्क है. रोजाना सांस्कृतिक कार्यक्रम और चित्रांकन प्रतियोगिताएं होगी. पिछले वर्ष 30 लाख की पुस्तके बिक्री और 25 हजार पाठकों के आगमन का रिकॉर्ड तोड़ने की उम्मीद है.
मेला समिति के अध्यक्ष अमरनाथ चटर्जी ने क्षेत्र की जनता से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में आकर पुस्तकें खरीदें, क्योंकि घर में रखी पुस्तकें आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनती हैं.



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